नई दिल्ली | सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok ने अमेरिका में अपने संचालन को लेकर बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। कंपनी ने अपने अमेरिकी कारोबार के लिए एक बहुमत अमेरिकी-स्वामित्व वाले संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) को अंतिम रूप दे दिया है। इस कदम के साथ ही चीनी स्वामित्व को लेकर लंबे समय से मंडरा रहे प्रतिबंध के खतरे को टाल दिया गया है।
नई इकाई का नाम TikTok USDS Joint Venture LLC रखा गया है, जो अमेरिका में 20 करोड़ से अधिक यूजर्स और करीब 75 लाख व्यवसायों को सेवाएं देगी। यह जॉइंट वेंचर डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन और एल्गोरिदम से जुड़े मामलों में कड़े अमेरिकी मानकों के तहत काम करेगा।
ByteDance की हिस्सेदारी घटी, अमेरिकी निवेशकों का दबदबा
समझौते के तहत अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के पास इस जॉइंट वेंचर की कुल 80.1 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि TikTok की चीनी मूल कंपनी ByteDance को केवल 19.9 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई है। इस तरह अमेरिका में TikTok का नियंत्रण लगभग पूरी तरह अमेरिकी निवेशकों के हाथ में चला गया है।
प्रमुख निवेशकों में टेक दिग्गज Oracle, प्राइवेट इक्विटी फर्म Silver Lake और अबू धाबी स्थित निवेश समूह MGX शामिल हैं। इन तीनों के पास लगभग 15-15 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा Dell Family Office, Alpha Wave Partners, Revolution और NJJ Capital भी इस सौदे का हिस्सा हैं।
वर्षों के राजनीतिक दबाव का नतीजा
यह समझौता अमेरिका में TikTok पर वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक और नियामक दबाव का परिणाम माना जा रहा है। वर्ष 2020 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए TikTok को बैन करने की प्रक्रिया शुरू की थी। तभी से अमेरिकी सरकार चीनी स्वामित्व को सीमित करने पर जोर दे रही थी।
ट्रंप ने खुद को दिया श्रेय
डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसका श्रेय खुद को दिया। उन्होंने कहा कि TikTok को “अमेरिकी देशभक्त निवेशकों” के हाथों में सौंपा जाना एक बड़ी उपलब्धि है। ट्रंप ने इस सौदे को मंजूरी देने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भी आभार जताया।
ट्रंप ने बयान में कहा कि TikTok अब अमेरिका में एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल मंच के रूप में काम करेगा और इसकी आवाज और प्रभाव पहले से कहीं अधिक होगा।
यह सौदा न केवल TikTok के भविष्य को अमेरिका में सुरक्षित करता है, बल्कि वैश्विक टेक कंपनियों पर बढ़ते सरकारी नियंत्रण और डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त रुख का भी संकेत देता है।