कुरुक्षेत्र | कुरुक्षेत्र जिले के आलमपुर गांव के प्रगतिशील किसान दिलबाग सिंह ने यह साबित कर दिया है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सही योजना और नवाचार से बड़ा व्यवसाय भी बन सकती है। एक लिमिटेड कंपनी में लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी छोड़कर दिलबाग ने गांव लौटने का फैसला किया और एकीकृत खेती मॉडल अपनाकर आज हर माह लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र में नौकरी करने के बाद वर्ष 2010 में गांव लौटे दिलबाग ने अपने पिता शेर सिंह द्वारा शुरू किए गए पोल्ट्री व्यवसाय से नई शुरुआत की। शुरुआत में 4300 मुर्गियों से पोल्ट्री फार्म चलाया, जिसे आगे बढ़ाते हुए 2012, 2016 और 2018 में तीन और पोल्ट्री यूनिट स्थापित कीं। पोल्ट्री से निकलने वाली खाद का उपयोग उन्होंने रासायनिक खाद के स्थान पर खेती में किया, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
खेती के साथ-साथ उन्होंने पोल्ट्री से निकलने वाले व्यर्थ पानी का उपयोग करते हुए तालाब बनाकर मछली पालन शुरू किया, जिससे हर साल दो से ढाई लाख रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके बाद खेतों में ही डेयरी यूनिट स्थापित कर प्रतिदिन करीब तीन क्विंटल दूध उत्पादन शुरू किया।
दिलबाग प्राकृतिक खेती के प्रबल समर्थक हैं। वह न केवल अपने खेतों में रसायनों से दूर रहते हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी मुफ्त में जैविक खाद उपलब्ध कराते हैं। इसके बावजूद वह हर वर्ष खाद बेचकर दो से ढाई लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी दिलबाग मिसाल हैं। उन्होंने 1997 से अब तक कभी पराली नहीं जलाई और पिछले 14 वर्षों से धान की सीधी बिजाई कर रहे हैं, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है। उनकी इस पहल से प्रभावित होकर 50 से अधिक किसान अब सीधी बिजाई अपना चुके हैं।
आज दिलबाग सिंह उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देखते हैं। उनका मानना है कि सही सोच और मेहनत से गांव में रहकर भी सम्मानजनक और समृद्ध जीवन जिया जा सकता है।