Shimla, 31 January-:मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी लंबित परियोजनाओं को अगले तीन महीनों में पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए इन क्षेत्रों के समग्र विकास को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
बैठक में पिछड़ा क्षेत्र उप-योजना, विधायक क्षेत्र विकास निधि योजना, मुख्यमंत्री ग्राम पथ योजना और अन्य स्थानीय योजनाओं की प्रगति का विश्लेषण किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि कई छोटे लेकिन आवश्यक कार्य जैसे हैंडपंप, पैदल रास्ते, नालियाँ, सामुदायिक भवन, फुट ब्रिज, सिंचाई नहरें और गांव की सड़कें लंबित हैं। उन्होंने कहा कि ये विकेन्द्रीकृत और आवश्यकता आधारित कार्य सीधे स्थानीय लोगों से जुड़े होते हैं और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के सिद्धांत के तहत प्रणालीगत असंतुलनों को सुधारना और ग्रामीण विकास प्रणाली को सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि 11,064 परियोजनाएं, जिनकी लागत 204 करोड़ रुपये थी, शुरू नहीं हुई थीं, जबकि 16,834 कार्य, जिनकी लागत 348 करोड़ रुपये थी, निर्माणाधीन थे।
सचिव योजना डॉ. अभिषेक जैन ने बताया कि अक्तूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच लंबित 9,689 कार्य पूरे किए गए और निर्माणाधीन 8,573 कार्य पूर्ण किए गए। शेष परियोजनाओं को अगले तीन महीनों में पूरा करने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से कार्य प्रगति की निगरानी करने और दैनिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए ताकि समयबद्ध निष्पादन और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शी, आवश्यकता-आधारित और न्यायसंगत विकास सुनिश्चित कर रही है, ताकि प्रत्येक गांव और समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचे।चंबा, कुल्लू और बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में फील्ड विजिट और समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं, और लंबे समय से लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर लिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने और विकास की गति बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।