पंचकूला | हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक गतिविधियों में लगातार रुकावटें बनी हुई हैं। प्रदेश के 180 ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर जिला प्रधानों, विधायकों और सांसदों के बीच मतभेद गहरा गए हैं। कई नामों पर सहमति न बनने के कारण पार्टी का संगठन पूरी तरह से खड़ा नहीं हो पा रहा है।
प्रदेश में कुल 33 जिले हैं, जिनमें अधिकांश जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां हो चुकी हैं और उन्हें प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा चुका है। इसके बावजूद केवल 26 जिलों में ही ब्लॉक कमेटियां बन पाई हैं। शेष सात जिलों में कमेटियों का गठन अभी तक इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि जिम्मेदार पदाधिकारियों के चयन पर सभी गुटों में एकमत नहीं बन पाई है।
जिला प्रधान और विधायक अपने-अपने गुटों में बंटे हुए हैं, जिससे संगठनात्मक सहमति नहीं बन पा रही। प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की नियुक्ति को तीन महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन कमेटी गठन अभी तक अधर में लटकी हुई है। इससे हरियाणा कांग्रेस का फ्रंटियल ऑर्गेनाइजेशन और प्रकोष्ठों में नियुक्तियों में भी देरी हुई है।
युवक कांग्रेस के अध्यक्ष निशित कटारिया को छोड़कर अन्य अग्रणी संगठनों और विभागों में सक्रिय नेतृत्व की कमी है। महिला कांग्रेस, इंटक, सेवादल और एनएसयूआइ सहित कई प्रमुख प्रकोष्ठों में नये अध्यक्षों को काम करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में पार्टी में 23 प्रकोष्ठ और विभाग हैं, जिनमें से 12 लंबे समय से खाली हैं। 11 विभागों में पद भरे हैं, लेकिन उनकी सक्रियता नगण्य है।
विशेष रूप से किसान कांग्रेस, जिसे पार्टी का प्रमुख प्रकोष्ठ माना जाता है, में धर्मवीर कोलेखां की अध्यक्षता के बावजूद कोई ठोस गतिविधि नहीं हो रही। ओबीसी विभाग में रमेश सैनी की नियुक्ति है, लेकिन संपूर्ण संगठन में गतिरोध और गुटबाजी की वजह से नई रणनीतियों और कार्यक्रमों पर काम ठप पड़ा हुआ है।
हरियाणा कांग्रेस के संगठन में यह संकट आगामी चुनावी रणनीतियों और पार्टी के प्रभाव पर असर डाल सकता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र सभी गुटों में समझौता नहीं हुआ, तो संगठनात्मक ढांचे में यह खामियां पार्टी के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।