राहुल चावला, धर्मशाला -:तिब्बत के सर्वोच्च धर्मगुरु 14वें दलाई लामा को प्रतिष्ठित ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने पर दुनिया भर के तिब्बतियों में खुशी और गर्व का माहौल है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते संघर्ष, हिंसा और तनाव के दौर में करुणा, अहिंसा और भाईचारे का संदेश देने वाले दलाई लामा को मिला यह सम्मान इंसानियत की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रैमी अवॉर्ड मिलने के बाद निर्वासित तिब्बत सरकार और तिब्बती समुदाय ने इसे केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि शांति और मानव मूल्यों की वैश्विक स्वीकार्यता बताया है। मैक्लोडगंज में तिब्बती समुदाय के लोगों ने इसे ऐतिहासिक पल करार दिया और कहा कि दलाई लामा का संदेश आज पूरी दुनिया के लिए पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।
निर्वासित तिब्बत सरकार की डिप्टी स्पीकर डोल्मा तेसरिंग तेखंग ने कहा कि दलाई लामा को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान चीन को इसलिए अखर रहा है क्योंकि दलाई लामा अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए पूरी दुनिया में प्रेम, करुणा और शांति का संदेश फैला रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चीन की नीतियां अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर हो रही हैं, जिससे चीन घबराया हुआ है।डोल्मा तेसरिंग तेखंग के मुताबिक, दलाई लामा की बढ़ती लोकप्रियता चीन के लिए चिंता का कारण बन गई है। खासकर युवा पीढ़ी के बीच उनके विचार ऑडियो संदेशों, पुस्तकों और प्रवचनों के माध्यम से तेजी से पहुंच रहे हैं, जिससे चीन की नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है।
वहीं, निर्वासित तिब्बत सरकार के सांसद तेसरिंग यांगचन ने कहा कि यह अवॉर्ड पूरे तिब्बती समुदाय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा न सिर्फ तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु हैं, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति और भाईचारे की प्रेरणा हैं।
तेसरिंग यांगचन ने कहा कि दुनिया भर में लोग दलाई लामा के विचारों को अपना रहे हैं और यही कारण है कि उनकी वैश्विक स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि हिंसा नहीं, बल्कि करुणा और संवाद ही स्थायी समाधान का रास्ता है।कुल मिलाकर, दलाई लामा को मिला ग्रैमी अवॉर्ड सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि शांति, अहिंसा और इंसानियत के संदेश की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनकर उभरा है।