बादशाहपुर । मानेसर स्थित हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास निगम में तैनात रहे सीनियर मैनेजर दलबीर सिंह भाटी को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन महीने अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी अधिकारी को अपने रिटायरमेंट वाले दिन ही रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उस समय कार्यालय में उसकी फेयरवेल पार्टी चल रही थी।
जानकारी के अनुसार, दलबीर सिंह भाटी ने निगम में कार्यरत सफाई ठेकेदार के 4.25 लाख रुपये के बिल पास कराने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। ठेकेदार ने इस मांग की शिकायत एसीबी को दी, जिसके बाद टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।
30 सितंबर 2021 को विजिलेंस/एसीबी टीम ने कार्यालय में छापा मारकर आरोपी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया। आरोपी ने पैसे अपनी जेब में रख लिए थे, जिसके बाद मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान किए गए फेनालफ्थेलीन टेस्ट में आरोपी के हाथ गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत ने भ्रष्टाचार को गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में नरमी समाज और न्याय व्यवस्था दोनों के साथ अन्याय है।
कोर्ट ने अपने 42 पन्नों के फैसले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है और उनके भ्रष्टाचार का असर समाज पर व्यापक रूप से पड़ता है। अदालत ने यह भी कहा कि हल्की सजा अपराधियों को प्रोत्साहित करती है और इससे जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है।
सजा सुनाते समय आरोपी ने अदालत के सामने दलील दी कि वह हृदय रोग सहित कई बीमारियों से पीड़ित है और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। वहीं अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने गंभीर अपराध किया है और समाज में मजबूत संदेश देने के लिए उसे अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत दलबीर सिंह भाटी को 5 साल की कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।