शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शुक्रवार को नगर निगम के बजट सत्र के दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस शासित शिमला नगर निगम में महापौर सुरेंद्र चौहान जैसे ही अपना तीसरा बजट पेश करने के लिए सदन में पहुंचे, भाजपा पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया। नारेबाजी और हंगामे के बीच भाजपा पार्षदों ने बजट सत्र का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
भाजपा पार्षदों का आरोप है कि महापौर का कार्यकाल ढाई वर्ष का था, जो अब पूरा हो चुका है। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार अब महापौर का पद महिला पार्षद को दिया जाना चाहिए था, लेकिन राज्य सरकार ने कार्यकाल को पांच वर्ष कर दिया है।
भाजपा का दावा है कि इस निर्णय को अभी तक राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है और मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में महापौर को बजट पेश करने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है।भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया पूरी किए महापौर का कार्यकाल बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में न्यायालय का स्पष्ट निर्णय नहीं आ जाता और राज्यपाल की स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक महापौर को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो बजटों में किए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया है। ऐसे में इस बार भी बजट में किए गए प्रावधान केवल दिखावटी और भ्रामक हैं। विरोध दर्ज कराते हुए भाजपा पार्षदों ने सदन से बाहर निकलकर अपना असंतोष जताया।