चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर 1 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। यह फैसला शिफ्ट अटेंडेंट पद पर 100 प्रतिशत बधिर अभ्यर्थी की नियुक्ति रद्द करने के मामले में दिया गया। हाईकोर्ट ने आयोग की सिफारिश के कारण अभ्यर्थी को अनावश्यक कठिनाई और मानसिक आघात झेलना पड़ा, इस आधार पर जुर्माने का आदेश दिया। कोर्ट ने अभ्यर्थी को यह राशि चार सप्ताह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने प्रशांत पांडेय की याचिका खारिज करते हुए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा नियुक्ति रद्द करने के फैसले को सही ठहराया। याचिकाकर्ता ने 2016 के विज्ञापन के तहत शिफ्ट अटेंडेंट पद के लिए आवेदन किया था।
कुल 2,426 पदों में से 36 पद आंशिक रूप से श्रवण बाधित अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित थे। याचिकाकर्ता को लिखित परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद चयनित घोषित किया गया और नियुक्ति पत्र जारी किया गया था।
हालांकि, ज्वाइनिंग के समय संबंधित कार्यालय ने कहा कि याचिकाकर्ता 100 प्रतिशत बधिर हैं और पद की प्रकृति सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील होने के कारण उन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया गया। इसके बाद निगम ने नियुक्ति रद्द कर दी। याचिकाकर्ता ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के उल्लंघन के रूप में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विज्ञापन में आरक्षण केवल आंशिक रूप से बधिर अभ्यर्थियों के लिए था, न कि पूरी तरह श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए। इसी आधार पर नियुक्ति रद्द करना न्यायसंगत पाया गया।
इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि आरक्षण नीतियों का पालन और पद की प्रकृति सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जबकि आयोग की लापरवाही पर जुर्माना लगाया गया।