कुरुक्षेत्र | धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कर्म की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज जिस मुकाम पर पहुंचा है, वह स्वयंसेवकों के निरंतर परिश्रम और समर्पण का परिणाम है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ‘सज्जन शक्ति’ को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 500 से अधिक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, न्यायाधीश और शिक्षाविद शामिल हुए। करीब 140 मिनट तक चले अपने संबोधन में उन्होंने संघ की लगभग सौ वर्षों की यात्रा, उसके मूल विचार और सामाजिक भूमिका के बारे में जानकारी दी।
मोहन भागवत ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। संघ भी इसी सोच के साथ काम करता है कि व्यक्ति अपने कर्म के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यशैली विशिष्ट है और इसकी तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती। आज दुनिया के कई देश भी संघ की कार्यप्रणाली को समझने में रुचि दिखा रहे हैं और उससे प्रेरणा ले रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि संघ के बारे में किसी भी प्रकार की धारणा बनाने से पहले उसकी शाखाओं में जाकर गतिविधियों को समझना चाहिए। शाखा में आने के लिए किसी प्रकार की फीस या पाबंदी नहीं है। जो व्यक्ति संघ को समझना चाहता है, वह कुछ समय तक इसकी शाखाओं में शामिल होकर इसके कामकाज को करीब से जान सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित लोगों के सवालों के जवाब भी दिए और संघ से जुड़ी कई जिज्ञासाओं को स्पष्ट किया।