शिमला, संजू-:हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए सियासी हलचल के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की नाराजगी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा कांग्रेस पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता रहे हैं और उन्होंने लंबे समय तक पार्टी तथा देश की सेवा की है। ऐसे में उन्हें पार्टी नेतृत्व से नाराज नहीं होना चाहिए।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि आनंद शर्मा ने कांग्रेस में रहते हुए कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।वे हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान से भी राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं और केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने समय-समय पर उन्हें बड़े अवसर दिए हैं और उनका राजनीतिक अनुभव भी काफी व्यापक है।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्यसभा के टिकट को लेकर कई बार मुख्यमंत्री से भी राय ली जाती है और अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान द्वारा सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। पार्टी संगठन में हर नेता को समय के साथ अवसर देने की परंपरा रही है। ऐसे में टिकट वितरण को लेकर असंतोष की स्थिति नहीं बननी चाहिए।उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा का संसदीय कार्यकाल और प्रदर्शन हमेशा अच्छा रहा है। वे संसद के एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं। लेकिन पार्टी को कई बार संगठनात्मक संतुलन और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने पड़ते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है।
प्रो. चंद्र कुमार ने अनुराग शर्मा को एक ऊर्जावान और युवा नेता बताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें आगे बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री और कांग्रेस हाईकमान के बीच विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में हर पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका मिलता है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि आनंद शर्मा को गांधी परिवार का हमेशा आशीर्वाद और समर्थन मिलता रहा है। यदि ऐसा नहीं होता तो पिछली बार उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया जाता। उस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें जिताने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया।
इस दौरान कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार पर आपदा राहत को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछले साल आई प्राकृतिक आपदाओं के कारण हिमाचल प्रदेश में कृषि और बागवानी क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। राज्य सरकार ने केंद्र से आर्थिक सहायता की मांग भी की थी।उन्होंने बताया कि गगल एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान आपदा से हुए नुकसान की पूरी जानकारी दी गई थी। उस समय विपक्ष के नेता और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी वहां मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने उस दौरान हिमाचल के लिए 1500 करोड़ रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि इतनी बड़ी घोषणा के बावजूद अब तक राज्य को कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद प्रधानमंत्री उस घोषणा को भूल गए हैं और अब उन्हें इस बारे में याद दिलाने के लिए पत्र लिखना पड़ेगा।उन्होंने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की थी और राज्य की वित्तीय स्थिति तथा आपदा राहत के मुद्दे पर चर्चा की थी। मुलाकात की तस्वीरें भी मीडिया में खूब चर्चा में रहीं, लेकिन अभी तक राहत राशि नहीं मिली है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि केंद्र से सहायता कब तक पहुंचेगी।
कृषि मंत्री ने भांग की खेती को लेकर भी सरकार की योजना साझा की। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार नियंत्रित और वैज्ञानिक तरीके से भांग की खेती को अनुमति देने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए एक नीति तैयार की जा चुकी है और इसे लागू करने के लिए जल्द ही विधानसभा में विधेयक लाया जाएगा।उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत भांग की खेती केवल औद्योगिक, औषधीय और अनुसंधान के उद्देश्य से की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार से भी अनुमति मांगी गई है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।सरकारी अनुमान के मुताबिक यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है तो हिमाचल प्रदेश को सालाना करीब 500 करोड़ से लेकर 2000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है।