चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने ट्रैवल एजेंटों से जुड़े कानून ‘हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स एक्ट-2025’ में संशोधन किया है। संशोधित विधेयक को बजट सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किया गया। राज्य सरकार ने पिछले साल डंकी रूट पर लगाम लगाने के लिए कानून बनाया था, जिसमें ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ दस साल तक की जेल और अर्जित संपत्ति जब्त करने का प्रावधान शामिल था।
विदेश मंत्रालय ने इस कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी। मंत्रालय का कहना था कि मौजूदा कानून एमिग्रेशन एक्ट 1983 के अनुरूप नहीं है, जो भारतीय नागरिकों के विदेश में नौकरी संबंधी मामलों को नियंत्रित करता है। मंत्रालय ने चेताया कि राज्य कानून की कुछ धाराओं का गलत फायदा उठाकर ट्रैवल एजेंट एमिग्रेशन एक्ट के नियमों से बच सकते हैं। विशेष रूप से वह नियम जिसमें विदेश में नौकरी भेजने वाले एजेंटों का प्रोटेक्टर जनरल ऑफ एमिग्रेंट्स के पास पंजीकरण अनिवार्य है।
इस आपत्ति को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने कानून में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले लोग प्रवासी की परिभाषा से बाहर होंगे, क्योंकि यह मामला केंद्र के कानून के अंतर्गत आता है। इसके अलावा, ट्रैवल एजेंट की परिभाषा में भी संशोधन किया गया है और इसमें अब विदेश में नौकरी दिलाने या भर्ती से जुड़ी सेवाएं शामिल नहीं होंगी।
सरकार ने एक नई धारा भी जोड़ी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि केंद्र और राज्य कानून में टकराव होने पर केंद्रीय कानून को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस संशोधन का उद्देश्य राज्य कानून को एमिग्रेशन एक्ट 1983 के अनुरूप बनाना और भर्ती एजेंटों पर निगरानी को मजबूत करना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने वाली एजेंसियां नियमों का पालन करें और उनके शोषण की संभावनाएं कम हों।