summer express, चंडीगढ़ | राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े कथित बैंकिंग फ्रॉड मामले की जांच के दौरान कई बैंक खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज किए जाने को लेकर आमजन से अपील जारी की है। जांच एजेंसी ने कहा है कि जिन खाताधारकों को लगता है कि उनका खाता इस मामले से किसी प्रकार से संबंधित नहीं है और गलती से फ्रीज किया गया है, वे अपना पक्ष ब्यूरो के समक्ष रख सकते हैं।
एसीबी के अनुसार संबंधित व्यक्ति या फर्म विजिलेंस ब्यूरो के टोल-फ्री व्हाट्सएप नंबर 9417891064 पर अपना लिखित प्रतिवेदन भेज सकते हैं। ब्यूरो ने आश्वासन दिया है कि प्राप्त शिकायतों और प्रतिवेदनों की गंभीरता से जांच की जाएगी और 48 घंटे के भीतर संबंधित व्यक्ति को की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।
जांच एजेंसी ने यह भी स्वीकार किया है कि मामले में आरोपियों की ओर से कई बार भ्रामक और अधूरी जानकारी दी गई, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के टालमटोल और गलत जवाबों के कारण जांच में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
इसी मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मोहाली के सेक्टर-117 निवासी मनीष जिंदल को भी गिरफ्तार किया है। इससे पहले हरियाणा के पंचायत विभाग से जुड़े एक सुपरिंटेंडेंट की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर 10 दिन की रिमांड मांगी थी, हालांकि अदालत ने उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दी।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि मनीष जिंदल इस कथित बैंकिंग फ्रॉड की साजिश तैयार करने और उसे अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल था। जांच में यह भी आरोप है कि उसने अन्य आरोपियों से करोड़ों रुपये नकद और कीमती सामान लिया था।
डिजिटल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के दौरान वह मुख्य आरोपी रिभव ऋषि और अभय के लगातार संपर्क में था। उसके बैंक खाते में भी कुछ संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं, जिसके आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आरोपी के परिजनों को भी सूचना दे दी है। बताया गया है कि आरोपी के कुछ रिश्तेदार पंचकूला के सेक्टर-21 में रहते हैं। जांच एजेंसी अब रिमांड के दौरान उससे मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।