Summer Express, कुरुक्षेत्र | भारतीय कुश्ती जगत में समन्वय की कमी के कारण महिला पहलवानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। 17 मार्च को कुश्ती से जुड़े दो महत्वपूर्ण आयोजनों की तारीख एक ही दिन तय होने से खिलाड़ियों में असमंजस की स्थिति बन गई है। उन्हें तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे चयन ट्रायल में हिस्सा लें या विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लें।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी महिला फ्रीस्टाइल कुश्ती चैंपियनशिप का आयोजन पहले से 17 से 20 मार्च तक निर्धारित है। इसी बीच भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) ने सीनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल की तारीख बदलकर 17 मार्च कर दी है। फेडरेशन के अनुसार, अल्बानिया से लौट रही टीम की फ्लाइट में देरी के कारण ट्रायल की तिथि में बदलाव किया गया है।
इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह उनकी पढ़ाई और भविष्य में स्पोर्ट्स कोटा के तहत सरकारी नौकरी के अवसरों से जुड़ी होती है। वहीं एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने और ओलंपिक जैसे बड़े मंच तक पहुंचने का रास्ता खोलते हैं।
कुश्ती कोच विजय कुमार का कहना है कि एक ही दिन दोनों कार्यक्रम रखने से खिलाड़ियों को नुकसान होगा। कई महिला पहलवान राष्ट्रीय स्तर के कैंप में रहने के साथ-साथ अपने विश्वविद्यालयों की ओर से भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती हैं। यदि प्रशासन और फेडरेशन आपसी तालमेल से किसी एक कार्यक्रम की तारीख बदल दें तो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का साल खराब होने से बच सकता है।
सोनीपत की 76 किलोग्राम वर्ग की पहलवान काजल, हिसार की 53 किलोग्राम वर्ग की ज्योति और रोहतक की 68 किलोग्राम वर्ग की कीर्ति सहित कई खिलाड़ियों ने कहा कि उन्होंने पूरे साल इन दोनों प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी की है। अब एक ही दिन आयोजन होने से उन्हें किसी एक अवसर को छोड़ना पड़ सकता है, जबकि दोनों ही उनके करियर के लिए अहम हैं।
भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि एशियन चैंपियनशिप के ट्रायल मुख्य रूप से राष्ट्रीय कैंप में शामिल खिलाड़ियों के लिए आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद पहलवानों की सूची की एक बार दोबारा जांच करवाई जाएगी और खिलाड़ियों के हित को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा।