समर एक्सप्रेस /कुल्लू, मनमिंदर -:जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर में तिब्बती समुदाय ने तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस की वर्षगांठ के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान भारत-तिब्बत सहयोग मंच के सहयोग से ढालपुर में रैली निकाली गई और चीन द्वारा तिब्बत में अपनाई जा रही नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। रैली के दौरान लोगों ने नारेबाजी करते हुए तिब्बत की आजादी की मांग उठाई।
कार्यक्रम के दौरान तिब्बती सहायता समूह के उप-सलाहकार पेमा नामग्याल ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पीआरसी सरकार तिब्बत को चीन का हिस्सा बताकर वहां की सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में तिब्बती बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में रखा जा रहा है, जहां तिब्बती भाषा और संस्कृति के प्रचार पर प्रतिबंध लगाया गया है।उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में बच्चों को कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा के तहत राजनीतिक शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा तिब्बती किसानों को बड़े पैमाने पर पुनर्वास और श्रम हस्तांतरण कार्यक्रमों के तहत प्रभावित किया जा रहा है।
पेमा नामग्याल ने बताया कि 22 जनवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के एक समूह ने भी बयान जारी कर कहा था कि वर्ष 2000 से 2025 के बीच करीब 40 लाख तिब्बती इन कार्यक्रमों से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी तिब्बत में लागू की जा रही नीतियों को स्थानीय समुदायों के लिए चिंताजनक मान रहा है।वहीं तिब्बत सेटलमेंट ऑफिसर तेंजिन ने कहा कि तिब्बती समुदाय पीआरसी सरकार की नीतियों का लगातार विरोध करता रहेगा और अपनी पहचान तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।