Summer express, अंबाला | पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब हरियाणा के अंबाला के प्रसिद्ध मिक्सी उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल और निर्यात पर पड़े असर के कारण यह करीब 250 करोड़ रुपये का उद्योग गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि इस उद्योग से जुड़े लगभग 15 हजार परिवारों की आजीविका पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
देश को पहली मिक्सी देने वाले अंबाला में इस समय करीब 200 छोटी-बड़ी इकाइयां मिक्सी, जूसर, ग्राइंडर और चॉपर का निर्माण करती हैं। इनके साथ 150 से अधिक ट्रेडर्स जुड़े हुए हैं। हालांकि, मौजूदा वैश्विक हालात के चलते उत्पादन और व्यापार दोनों प्रभावित हुए हैं।
उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, कच्चे माल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इसके चलते उत्पादों की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है और कंपनियों को मजबूरन कीमतों में करीब 15 प्रतिशत तक इजाफा करना पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर मांग पर भी दबाव बना हुआ है, जिससे कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
अंबाला से निर्मित मिक्सी और अन्य उत्पाद दुबई, कतर, युगांडा सहित कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन युद्ध जैसे हालात के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, परिवहन महंगा हुआ है और निर्यात में गिरावट दर्ज की जा रही है।
उद्योग विशेषज्ञ बताते हैं कि एक मिक्सी को तैयार करने में 300 से अधिक पुर्जों का इस्तेमाल होता है, जिनमें स्टील, तांबा, प्लास्टिक, रबर और अन्य धातुएं शामिल हैं। इन सभी कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत हर स्तर पर बढ़ चुकी है।
लघु उद्योग होने के कारण मिक्सी निर्माता सीमित मुनाफे पर काम करते हैं। ऐसे में कीमतें ज्यादा बढ़ाने पर बाजार में मांग घटने का खतरा रहता है, जबकि कीमतें स्थिर रखने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुणवत्ता से समझौता करना भी उनके लिए विकल्प नहीं है, क्योंकि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है, तो इस क्षेत्र का मिक्सी उद्योग और गहरे संकट में जा सकता है। इसके साथ ही उत्पादन में कटौती और लागत नियंत्रण जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर श्रमिकों और उनसे जुड़े परिवारों पर पड़ेगा।