मंडी , धर्मवीर-: हिमाचल प्रदेश में बीती 15 अप्रेल से फायर सीजन शुरू हो गया है, जो आगामी 3 महीनों यानी 15 जुलाई तक रहेगा। इस सीजन के दौरान हिमाचल में भीषण गर्मी देखने को मिलती है, जिससे आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती है। जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण मानवीय भूल ही मानी जाती है। या तो शरारती तत्व इन घटनाओं को अंजाम देते हैं, या फिर घासनियों में आग लगाते हुए बेकाबू तरीके से आग जंगलों में फैल जाती है।
वन विभाग ने जंगलों में आग लगाने वाले शरारती तत्वों की पहचान कर उन्हें सीधे जेल भेजने की योजना बनाई है। उक्त व्यक्ति पर वन संपदा नष्ट करने के लिए जुर्माना भी लगाया जाएगा। वन अधिनियम के तहत विभाग की ओर से यह कार्रवाई की जाएगी। मंडी जिला बात की जाए तो यहां भी फायर सीजन के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया दल के साथ विभिन्न टीमें आधुनिक उपकरणों के साथ सक्रिय हो गई हैं। विभाग ने आगजनी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जनवरी-फरवरी माह में अभियान चलाकर ज्वलनशील पदार्थ पाइन नीडल यानी चलारू को पहले ही समेट दिया है। इसके अलावा विभाग वन की टीमें शिविरों के माध्यम से भी लोगों को जंगलों में आग न लगाने और इससे होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक भी कर चुकी हैं। वन मंडल मंडी डीएफओ वासु डोगर ने बताया कि वन परिक्षेत्र पर फायर रक्षकों की तैनाती करने के साथ फायर लाइन भी खीच दी गई है, ताकि आगजनी की घटना होने पर उसे वहीं पर नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने जंगलों में आगजनी की घटना पेश आने पर जनता से विभाग को जल्द से जल्द सूचित करने की भी अपील की है।
2025 में 105 घटनाओं में 1031 हेक्टेयर भूमि को पहुंचा है नुकसान :
बता दें कि गर्मियों के सीजन के दौरान प्रदेश के जंगलों में हर साल सैंकड़ों आगजनी की घटनाएं पेश आती हैं। जिससे बहुमल्य वन संपदा के साथ जंगल मे रहने वाले जीव-जंतु भी इन घटनाओं में राख हो जाते हैं। जिला में पिछले साल की बात करें तो मंडी के पांचों वन मंडलों में 105 आगजनी की घटनाएं सामने आयी हैं। जिसमें 1031 से अधिक हेक्टेयर भूमि को एक करोड़ के करीब नुकसान विभाग को झेलना पड़ा है।