Summer express/कांगड़ा, संजीव -:हिमाचल प्रदेश के नूरपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बॉयज स्कूल को लेकर सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है। 157 साल पुराने इस ऐतिहासिक संस्थान के स्टेटस में बदलाव को लेकर नगरवासियों और अभिभावकों ने कड़ा विरोध जताया है।इसी मुद्दे पर भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री राकेश पठानिया भी अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भले ही स्कूल को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन इसका स्तर कम करना चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
पठानिया ने बताया कि वर्तमान में स्कूल में लगभग 60 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और आने वाले समय में यह संख्या 150 तक पहुंच सकती है। ऐसे में स्कूल को कमजोर करना न तो तर्कसंगत है और न ही बच्चों के हित में। उन्होंने इस संस्थान को नूरपुर की ऐतिहासिक पहचान बताते हुए कहा कि इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इस स्कूल में हिमाचल प्रदेश बोर्ड के तहत सभी विषय पढ़ाए जाते थे, लेकिन अब व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन स्कूलों में सीबीएसई प्रणाली लागू करने की बात की जा रही है, वे आवश्यक आधारभूत सुविधाओं, जैसे खेल मैदान, को भी पूरा नहीं करते।
पूर्व मंत्री ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कॉलेज को नई इमारत में स्थानांतरित करने और स्कूल को मौजूदा कॉलेज भवन में शिफ्ट करने का प्रस्ताव पास करवाया था, जिसके लिए 12.5 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हुए थे। हालांकि, पिछले तीन वर्षों से यह परियोजना ठप पड़ी हुई है।अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले के खिलाफ विरोध जारी रहेगा और छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।