Summer express, नई दिल्ली | रोज वैली पोंजी घोटाले में ठगे गए लाखों निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एसेट डिस्पोजल कमेटी (ADC) के साथ मिलकर अब तक 1.7 लाख से अधिक निवेशकों को 127.69 करोड़ रुपये वापस दिलाए हैं। अप्रैल 2026 तक यह रिकवरी प्रक्रिया कई चरणों में सफलतापूर्वक पूरी की गई है, जिसे पारदर्शी और पीड़ित-केंद्रित कार्रवाई की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, ED ने अपनी भूमिका सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रखी, बल्कि जब्त की गई संपत्तियों को बेचकर पीड़ितों तक पैसा पहुंचाने में भी सक्रिय भागीदारी निभाई है। रोज वैली ग्रुप ने पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और अन्य राज्यों में ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करीब 17,520 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिनमें से 6,666 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं किए गए।
अब तक ED ने विभिन्न राज्यों में फैली करीब 1,568 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच या जब्त किया है। इन संपत्तियों को नकदी में बदलकर पीड़ितों को अधिकतम मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया जारी है।
मुआवजा वितरण में तेजी लाने के लिए ED और ADC ने तकनीक का सहारा लिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम के जरिए दावों की जांच और भुगतान प्रक्रिया को ऑटोमेट किया जा रहा है। इस पहल को 31 मार्च को हाई कोर्ट से मंजूरी मिली थी।
इससे पहले, 22 अप्रैल 2025 को ED ने भुवनेश्वर की विशेष अदालत के निर्देश पर ADC को 517.54 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सौंपा था, जिससे मुआवजा प्रक्रिया को गति मिली।
रिफंड सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए ADC ने सरकारी कंपनी ‘स्टॉक होल्डिंग डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड’ के साथ समझौता किया है। इसके तहत KYC डेटा सत्यापन और दावों के मिलान की प्रक्रिया को तय समय-सीमा में पूरा किया जा रहा है।
ED ने स्पष्ट किया है कि वह अन्य चिटफंड मामलों की भी जांच कर रही है और पीड़ितों को उनकी राशि जल्द लौटाने के लिए कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी का लक्ष्य अपराध से अर्जित संपत्तियों को सुरक्षित कर उन्हें नकदी में बदलकर वैध हकदारों तक पारदर्शी और तेज तरीके से पहुंचाना है।