हमीरपुर, अरविंद -:हमीरपुर ज़िले में बढ़ती गर्मी और हर साल होने वाली जंगलों में आगजनी की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। जंगलों को आग से बचाने के लिए विभाग ने पहले से तैनात फायर वॉचर्स के साथ अब प्रत्येक वन बीट क्षेत्र में ‘वन मित्रों’ की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आग की घटनाओं को समय रहते रोकना और नुकसान को न्यूनतम करना है।
ज़िले में कुल 70 वन बीट हैं, और हर बीट के लिए एक-एक वन मित्र नियुक्त किया गया है। इन वन मित्रों को हाल ही में सुंदर नगर स्थित वन विभाग की अकादमी में चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में उन्हें जंगलों में आग लगने के कारण, आग से बचाव के उपाय, और आग लगने की स्थिति में तुरंत उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई। साथ ही, उन्हें सुरक्षा उपकरणों के उपयोग और टीमवर्क के महत्व पर भी प्रशिक्षित किया गया।
हमीरपुर ज़िले के जंगलों में चीड़ के पेड़ अधिक संख्या में पाए जाते हैं। चीड़ की सूखी पत्तियां अत्यधिक ज्वलनशील होती हैं, जिससे आग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। हर वर्ष आगजनी की घटनाओं के कारण लाखों-करोड़ों रुपये की वन संपदा को नुकसान होता है, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जिला वन अधिकारी अंकित कुमार सिंह ने बताया कि एक अप्रैल 2026 से फायर सीजन शुरू हो चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। पूरे 16,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र को तीन अलग-अलग जोनों में विभाजित किया गया है ताकि निगरानी और प्रबंधन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।इसके अलावा, आग की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए जंगलों में फायर लाइनों की सफाई भी की गई है। फायर लाइनें ऐसी खाली पट्टियां होती हैं जो आग को फैलने से रोकती हैं। वन मित्रों की तैनाती के साथ-साथ इन व्यवस्थाओं से उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ष जंगलों में आगजनी की घटनाओं में कमी आएगी और वन संपदा को सुरक्षित रखा जा सकेगा।