30 June, 2025
सनातन धर्म में भगवान शिव को “भोलेनाथ” के नाम से जाना जाता है — देवों के देव महादेव, जो अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। सप्ताह के सात दिनों में सोमवार का दिन विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और महामृत्युंजय जाप एवं रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठानों से शिवशक्ति की आराधना करते हैं।
क्यों प्रिय है सोमवार का दिन?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार का संबंध चंद्रमा से है, और चंद्रमा को स्वयं भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। चंद्रमा को शीतलता, शांति और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सोमवार को शिव की पूजा करने से मन और मस्तिष्क को शांति प्राप्त होती है।
इसके अतिरिक्त, कई कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब विष निकला तो भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया, जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। यह घटना सोमवार के दिन ही मानी जाती है, और तभी से इस दिन को शिवजी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया।
सोमवार की पूजा विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा, और आक का फूल अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें
- व्रत रखने वाले सिर्फ फलाहार करें या निर्जल उपवास भी कर सकते हैं
- शाम को शिव की आरती कर प्रसाद बांटे
सोमवार व्रत का फल:
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से सोमवार का व्रत रखते हैं, उन्हें सौभाग्य, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। कुंवारी कन्याएं इस दिन व्रत रखकर मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने की कामना करती हैं, और विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह उपवास करती हैं।
निष्कर्ष:
सोमवार का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है। भगवान शिव की भक्ति मन, वचन और कर्म को शुद्ध करती है। यदि आप अपने जीवन में शांति, सफलता और स्वास्थ्य की कामना करते हैं, तो सोमवार का व्रत और शिव उपासना एक अमोघ साधन हो सकता है।