वॉशिंगटन | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की पुष्टि करते हुए कहा है कि यह डील दोनों देशों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और अधिक सक्षम बनाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस समझौते में शुल्क (टैरिफ) काफी कम रखे जाएंगे, जिससे व्यापार को नई गति मिलेगी।
ट्रंप ने कहा, “भारत के साथ एक बेहतरीन समझौते की संभावना है। यह पारंपरिक से हटकर एक अलग किस्म की डील होगी, जो हमें भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच देगी। अभी तक भारत बाहरी कंपनियों के लिए अपने बाजार को सीमित रखता है, लेकिन अगर यह बदला, तो शुल्क भी कम किए जाएंगे।”
वार्ता निर्णायक मोड़ पर
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। इसकी डेडलाइन 9 जुलाई तय की गई है। अगर तब तक समझौता नहीं होता, तो 26% प्रतिशोधात्मक टैरिफ, जिन्हें अस्थायी रूप से टाल दिया गया था, फिर से लागू हो सकते हैं।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें प्रमुख वार्ताकार राजेश अग्रवाल शामिल हैं, वाशिंगटन में तय समय से अधिक रुक गया है। गुरुवार और शुक्रवार की बातचीत को बढ़ा दिया गया है ताकि अंतरिम समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।
कृषि उत्पादों को लेकर भारत का सख्त रुख
भारत, विशेष रूप से कृषि सेक्टर को लेकर सतर्क है। छोटे किसानों की बड़ी संख्या के कारण भारत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की विदेशी दखल से बचना चाहता है। खासतौर पर डेयरी सेक्टर को भारत ने अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत नहीं खोला है।
अमेरिका की मांगें और भारत की प्राथमिकताएं
अमेरिका चाहता है कि भारत सेब, मेवे और जीएम फसलों जैसे उत्पादों पर शुल्क कम करे, जबकि भारत की मांग है कि उसके श्रम-प्रधान उत्पाद—जैसे कपड़ा, गहने, चमड़ा, झींगा, अंगूर और तिलहन—को अमेरिकी बाजार में प्राथमिकता मिले और उन पर टैरिफ घटाया जाए।
2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भले ही यह एक अंतरिम समझौता हो, लेकिन दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Comprehensive BTA) की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इसका पहला चरण 2024 के फॉल सीज़न तक पूरा करने की योजना है। अंतिम लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है।