खामोश आंखों में चमका सफलता का सपना, करनाल के दिव्यांग विद्यार्थियों ने रचा नया इतिहास
करनाल/राकेश कुमार शर्मा-:करनाल के माता प्रकाश कौर संस्थान में उस समय भावुक और गर्व भरा माहौल देखने को मिला,जब दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल करने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।ये वे बच्चे हैं जो ना सुन सकते हैं और ना ही बोल सकते हैं, लेकिन अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर इन्होंने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे हरियाणा का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर पर्सन्स विद स्पीच एंड हियरिंग इम्पेयरमेंट की चेयरपर्सन मेगा भंडारी ने संस्थान पहुंचकर विद्यार्थियों को सम्मानित किया और उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हरियाणा बोर्ड की परीक्षाओं में सोसायटी से जुड़े करनाल, हिसार और गुरुग्राम स्थित तीनों संस्थानों का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। सभी विद्यार्थियों ने सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक कमी की मोहताज नहीं होती।करनाल संस्थान की बात करें तो यहां दसवीं कक्षा में 84 और बारहवीं में 54 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। सभी विद्यार्थी सफल रहे और कई छात्रों ने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि ने शिक्षकों और अभिभावकों को भी भावुक कर दिया।
मेगा भंडारी ने कहा कि इन संस्थानों में बच्चों को केवल किताबी शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न व्यावसायिक और कौशल आधारित कोर्स भी कराए जाते हैं। पंचकूला समेत कई केंद्रों पर डीएड और अन्य वोकेशनल कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बच्चे भविष्य में अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।उन्होंने बताया कि इन संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर चुके कई विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोई प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत है तो कोई न्यायालयों और निजी संस्थानों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है। यह संस्थान उन बच्चों के लिए उम्मीद और आत्मविश्वास का केंद्र बन चुके हैं, जिन्हें समाज अक्सर कमजोर समझ लेता है।सम्मान समारोह के दौरान विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी, आत्मविश्वास और सफलता की चमक साफ दिखाई दी। यह पल केवल पुरस्कार लेने का नहीं था, बल्कि उन संघर्षों की जीत का था, जिन्हें इन बच्चों ने चुपचाप सहा और अपनी मेहनत से सफलता में बदल दिया।