Summer express, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, उसके बोर्डों, निगमों और विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों कच्चे कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कर्मचारियों के नियमितीकरण संबंधी दावों पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 अप्रैल 2026 को दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के आधार पर सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जाए और छह महीने के भीतर कारण सहित निर्णय लिया जाए। साथ ही अंतिम फैसला आने तक कर्मचारियों की मौजूदा सेवा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं किया जाएगा।
खंडपीठ ने ‘सिंह मामले’ में सिंगल बेंच द्वारा 22 जनवरी 2025 को दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अब वर्ष 1996, 2003, 2011, 2014 और 2024 की नियमितीकरण नीतियों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय संवैधानिक सिद्धांतों के तहत विचार किया जाएगा।
अदालत ने माना कि ‘उमा देवी’ फैसले और बाद में ‘योगेश त्यागी’ मामले में सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या के बाद राज्य सरकार को प्रत्येक कर्मचारी की सेवा अवधि, पात्रता और संबंधित नीति की वैधता के आधार पर अलग-अलग निर्णय लेना होगा।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सभी कर्मचारियों के मामलों की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। इसके बाद हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई की बजाय पूरे मामले को प्रशासनिक पुनर्विचार के लिए भेज दिया।
कोर्ट ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर अपने संबंधित विभागों को विस्तृत अभ्यावेदन सौंपें।इन मामलों में हरियाणा सरकार के अलावा उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम, नगर निगम पानीपत, नगर परिषद भिवानी और हरियाणा आवास बोर्ड समेत कई सरकारी संस्थाएं पक्षकार थीं।