अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने महिलाओं और आम नागरिकों के संघर्ष की बताया सफलता
Summer express/शिमला, संजू -: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) को शिफ्ट करने और आईजीएमसी में गायनी ओपीडी स्थानांतरित करने के सरकारी फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश को महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) की संयोजक फालमा चौहान ने बुधवार को इसे महिलाओं और आम नागरिकों के संघर्ष की सफलता बताया।
फालमा चौहान ने कहा कि संगठन पिछले एक महीने से अस्पताल की शिफ्टिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहा था। इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि कमला नेहरू अस्पताल वर्षों से महिलाओं को समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता आ रहा है और यह प्रदेश की महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों में से एक है।ऐसे में अस्पताल की सेवाओं को दूसरी जगह स्थानांतरित करना महिलाओं के हितों के खिलाफ है।उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान न केवल शिफ्टिंग पर रोक लगाई, बल्कि प्रदेश सरकार को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।अदालत ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या आईजीएमसी में वही सुविधाएं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, जो वर्तमान में कमला नेहरू अस्पताल में महिलाओं को मिल रही हैं।
फालमा चौहान ने कहा कि सरकार को अस्पताल को शिफ्ट करने के बजाय मौजूदा परिसर में ही आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए, ताकि महिलाओं को इलाज के लिए किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल की शिफ्टिंग पर रोक लग गई है, जिससे हजारों महिलाओं को राहत मिली है। अब सभी की निगाहें सरकार की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसे अदालत में तीन दिनों के भीतर पेश किया जाना है।