करनाल /राकेश कुमार शर्मा-:करनाल के घरौंडा में आयोजित होने जा रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। 17 मई से 23 मई तक अनाज मंडी घरौंडा में प्रस्तावित इस विशाल धार्मिक आयोजन को अचानक रद्द कर दिया गया।आयोजन रद्द होने के पीछे टेंट भुगतान, धार्मिक अनुष्ठानों के खर्च और पंडितों की दक्षिणा को लेकर पैदा हुआ आर्थिक विवाद बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कथा आयोजन की तैयारियां पिछले करीब तीन सप्ताह से बड़े स्तर पर चल रही थीं। कथा स्थल पर विशाल पंडाल, मंच, लाइटिंग, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का काम लगभग पूरा हो चुका था। आयोजन को लेकर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल था और हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अंतिम समय में आर्थिक विवाद सामने आने के बाद पूरा कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।यह धार्मिक आयोजन दृष्टि फाउंडेशन से जुड़े दंडी स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन में तथा स्वामी विवेकानंद चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा था।आयोजन से जुड़े लोगों का दावा था कि कथा को भव्य रूप देने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अब भुगतान को लेकर कई पक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
कथा शुरू होने से पहले धार्मिक विधि-विधान भी प्रारंभ हो चुके थे। करनाल की दीवान कॉलोनी स्थित एक मकान में पिछले कई दिनों से हवन, जप और पूजा-पाठ चल रहा था। इन अनुष्ठानों को संपन्न कराने के लिए शहर के कई पंडितों को बुलाया गया था। मुख्य पंडित सत्यनारायण शास्त्री ने बताया कि 12 मार्च से लगातार आठ पंडित पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ में जुटे हुए थे। सभी पंडितों को मिलाकर करीब दो लाख रुपये दक्षिणा देने की बात तय हुई थी।
पंडितों के अनुसार कुछ लोग दिन में और कुछ रात के समय अनुष्ठान कर रहे थे। प्रत्येक पंडित के लिए प्रतिदिन 700 रुपये मेहनताना निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक किसी को पूरा भुगतान नहीं मिला। पंडितों का आरोप है कि आयोजन से जुड़े जिन लोगों ने उन्हें बुलाया था, अब उनके फोन बंद आ रहे हैं और कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए सामने नहीं आ रहा।
मुख्य पंडित सत्यनारायण शास्त्री ने कहा कि उन्हें सतीश और अशोक कल्याण नामक व्यक्तियों के कहने पर बुलाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब आयोजकों, संयोजकों और संबंधित जिम्मेदार लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। पंडितों का कहना है कि पूजा सामग्री अभी भी मौके पर रखी हुई है और यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे सामान वापस उठाने को मजबूर होंगे।विवाद के बीच उस मकान के मालिक ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है, जहां धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। मकान मालिक का कहना है कि धार्मिक आयोजन के नाम पर मकान किराए पर लिया गया था, लेकिन पिछले दो महीनों का करीब 80 हजार रुपये किराया और लगभग 13 हजार रुपये बिजली बिल अब तक नहीं चुकाया गया। उन्होंने बताया कि धार्मिक कार्यक्रम का हवाला देकर मकान लिया गया था, इसलिए उन्होंने भरोसा कर जगह उपलब्ध करवा दी थी।
अब आयोजन रद्द होने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्षेत्र में जिस कथा को लेकर धार्मिक उत्साह और भव्य तैयारियों का माहौल था, वही आयोजन अब अव्यवस्था और विवाद की वजह बन गया है। पंडितों की दक्षिणा, टेंट और अन्य व्यवस्थाओं के भुगतान को लेकर स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।फिलहाल आयोजन से जुड़े जिम्मेदार लोगों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पंडितों और अन्य संबंधित पक्षों की निगाहें अब आयोजकों के जवाब और भुगतान पर टिकी हुई हैं।