Summer express, नई दिल्ली। कई दिनों से जारी भीषण गर्मी के बाद मौसम ने अचानक करवट ली, लेकिन यह राहत भारी तबाही के रूप में सामने आई। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि और वज्रपात ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। अलग-अलग राज्यों में हुए हादसों में अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बिजली, परिवहन और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला, जहां आंधी, बारिश और बिजली गिरने से जुड़े हादसों में 20 लोगों की जान चली गई। बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे। कई जिलों में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। वाराणसी में तेज हवाओं की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई, जबकि प्रयागराज में मई महीने में एक दिन में सबसे अधिक बारिश का 55 वर्ष पुराना रिकॉर्ड टूट गया।
बिहार में भी खराब मौसम ने भारी नुकसान पहुंचाया। तेज आंधी, बारिश और वज्रपात की घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो गई। पटना और गया समेत कई जिलों में तेज हवाओं के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। कई उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा और रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा। नेपाल में हुई बारिश के कारण पश्चिमी चंपारण क्षेत्र में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में तुंगनाथ-चोपता ट्रैक पर वज्रपात की चपेट में आने से लखनऊ के दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य पर्यटक घायल हो गए। प्रशासन और राहत एजेंसियों ने प्रतिकूल मौसम के बीच 50 से अधिक पर्यटकों का सुरक्षित रेस्क्यू किया।
झारखंड और हिमाचल प्रदेश में भी तेज हवाओं और बारिश से नुकसान की खबरें हैं। वहीं दक्षिण बंगाल में आए भीषण तूफान, तेज बारिश और आकाशीय बिजली ने व्यापक तबाही मचाई, जहां सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और कई लोग घायल हुए हैं।
मौसम की इस मार का असर रेल और हवाई यातायात पर भी पड़ा। कई स्थानों पर रेल मार्ग बाधित रहे, जबकि खराब मौसम के कारण अनेक उड़ानों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं तथा मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।