Summer express, बलिंद्र कुमार, कैथल। जिले में धान सीजन के दौरान किसानों को यूरिया खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। विभाग की ओर से खाद वितरण केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह ने विभिन्न खाद वितरण केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यूरिया खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग द्वारा पांच विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो जिलेभर में खाद विक्रेताओं और वितरण केंद्रों की निगरानी कर रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि कोई विक्रेता निर्धारित नियमों के विरुद्ध खाद की बिक्री करता है या कालाबाजारी में संलिप्त पाया जाता है तो इसकी तुरंत सूचना कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने बताया कि जिले में कुल 550 खाद वितरण केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से 42 पैक्स के तहत 124 सेल प्वाइंट बनाए गए हैं। यूरिया खाद की कुल आपूर्ति का 60 प्रतिशत स्टॉक पैक्स केंद्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि 40 प्रतिशत स्टॉक निजी खाद विक्रेताओं के माध्यम से वितरित किया जा रहा है।
इन दिनों जिले में धान की रोपाई का कार्य जोरों पर है, जिसके चलते किसानों को यूरिया खाद की अधिक आवश्यकता पड़ रही है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में यूरिया खाद की वार्षिक आवश्यकता लगभग 90 हजार मीट्रिक टन है। वर्तमान में 23 हजार मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जबकि अब तक 30 हजार मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। जिले में अब तक कुल 54 हजार 400 मीट्रिक टन यूरिया खाद की आपूर्ति हो चुकी है।
वहीं डीएपी खाद की बात करें तो जिले में इसकी कुल आवश्यकता करीब 13 हजार मीट्रिक टन है। अब तक 6 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की आपूर्ति की जा चुकी है और वर्तमान में 3 हजार 700 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है।
कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को खाद की किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी और जरूरत के अनुसार लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।