Summer express, भूपेंदर ठाकुर , सोलन। हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर और विश्व प्रसिद्ध कालका-शिमला रेलवे के गौरवशाली इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “विरासत के मुसाफ़िर” का विशेष प्रदर्शन सोलन स्थित होटल ग्रैंड पैरागॉन पैलेस में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और रेलवे विरासत से जुड़े लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
डॉक्यूमेंट्री में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कालका-शिमला रेलवे के ऐतिहासिक महत्व, दुर्लभ तस्वीरों, पुराने दस्तावेजों, रेल स्मृतिचिह्नों और इससे जुड़ी अनकही कहानियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। फिल्म के माध्यम से दर्शकों को इस ऐतिहासिक रेल मार्ग की विरासत और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ एसडीएम सोलन पूनम बंसल ने किया। इस अवसर पर इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, रेलवे विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने डॉक्यूमेंट्री की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
डॉक्यूमेंट्री के प्रस्तुतकर्ता एवं विरासत संग्राहक सुरिंदर कुमार वर्मा ने कहा कि इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य कालका-शिमला रेलवे से जुड़ी अमूल्य धरोहर को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक इसकी ऐतिहासिक महत्ता पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म वर्षों के शोध, संग्रहित अभिलेखों और दुर्लभ ऐतिहासिक फोटोग्राफ्स पर आधारित है, जो दर्शकों को इतिहास की एक अनूठी यात्रा का अनुभव कराती है।
डॉक्यूमेंट्री में यह भी दर्शाया गया है कि कालका-शिमला रेलवे केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास का जीवंत प्रतीक है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने ऐसी विरासत आधारित परियोजनाओं को आगे भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।