Summer express, शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन की चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत कर लिया है। प्रदेश में हर साल बढ़ रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए SDRF को अब कई आधुनिक और अत्याधुनिक सुरक्षा एवं रेस्क्यू उपकरणों से लैस किया गया है। इन नए उपकरणों के शामिल होने से बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना और दुर्गम क्षेत्रों में चलाए जाने वाले राहत एवं बचाव अभियानों में तेजी और प्रभावशीलता आने की उम्मीद है।
एसडीआरएफ ने इस वर्ष अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाने के लिए कुल 34 नए आधुनिक उपकरण खरीदे हैं। इनमें छह रबराइज्ड रेस्क्यू बोट्स, तीन हाई-प्रेशर एयर कम्प्रेसर्स, तीन इमरजेंसी लाइटिंग टावर्स, 12 डीप डाइविंग किट्स, चार एयर लिफ्टिंग बैग्स और छह कांग अल्पाइन स्ट्रेचर्स शामिल हैं। ये उपकरण विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, गहरे पानी में सर्च ऑपरेशन चलाने, अंधेरे और दुर्गम क्षेत्रों में राहत कार्य करने तथा घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मददगार साबित होंगे।
वर्तमान समय में एसडीआरएफ के पास 359 विभिन्न श्रेणियों के विशेषीकृत आपदा राहत उपकरण उपलब्ध हैं, जिन्हें प्रदेश की अलग-अलग इकाइयों में रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। विभाग का दावा है कि इन उपकरणों के जरिए आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान एसडीआरएफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2023 और 2025 में मंडी जिले के थुनाग, कुल्लू और बिलासपुर समेत कई क्षेत्रों में आए संकट के दौरान एसडीआरएफ ने बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाए थे। इन अभियानों में आधुनिक उपकरणों की मदद से कई लोगों की जान बचाई गई, जबकि मलबे में दबे शवों को भी बाहर निकाला गया।
एसपी एसडीआरएफ अर्जित सेन ने बताया कि मानसून सीजन के दौरान पूरी टीम 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक उपकरणों के शामिल होने से फोर्स की कार्यक्षमता और आपदा से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2023 में प्रदेश में भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं में करीब 428 लोगों की जान गई थी। वहीं 2024 में लगभग 300 और 2025 में करीब 400 लोगों की मौत दर्ज की गई। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य हमेशा चुनौतीपूर्ण रहते हैं, ऐसे में SDRF को आधुनिक संसाधनों से लैस करना सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है।