Summer express, संजू, शिमला। हिमाचल प्रदेश में मिड डे मील वर्कर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर उतर आए हैं। सीटू से संबंधित मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले सोमवार को टॉलैंड से सचिवालय तक जोरदार रोष रैली निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला वर्कर्स और यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने वेतन बढ़ोतरी, पूरे 12 महीने का वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और नियमितीकरण समेत कई लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि केंद्र और राज्य सरकारें वर्षों से मिड डे मील वर्कर्स की समस्याओं की अनदेखी कर रही हैं और उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

यूनियन की राज्य महासचिव शांति देवी और अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में एक रुपये तक की बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही। यूनियन नेताओं ने कहा कि वर्कर्स को समय पर वेतन नहीं मिलता और कई बार तीन-तीन महीने तक भुगतान लंबित रखा जाता है। इतना ही नहीं, भुगतान भी किस्तों में किया जाता है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि स्कूलों में 25 बच्चों की अनिवार्य संख्या की शर्त के कारण कई मिड डे मील वर्कर्स की नौकरी खतरे में पड़ जाती है। बच्चों की संख्या कम होने पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
यूनियन ने सरकार से मांग की कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप मिड डे मील वर्कर्स को पूरे 12 महीने का वेतन दिया जाए। इसके अलावा हरियाणा की तर्ज पर 7 हजार रुपये मासिक वेतन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह छुट्टियां, ग्रेच्युटी और पेंशन सुविधा, मेडिकल जांच का खर्च विभाग द्वारा वहन करने तथा नियमितीकरण की स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी उठाई गई।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।