Summer express, अंकुर कपूर , चंडीगढ़ I हरियाणा के पूर्व मंत्री और इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक संपत सिंह ने चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पानी के मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा के हिस्से के पानी के साथ लगातार अन्याय हो रहा है और इस मुद्दे पर कांग्रेस व भाजपा एक ही पंक्ति में खड़ी नजर आ रही हैं।
संपत सिंह ने कहा कि 1954 के जल समझौते के तहत स्पष्ट प्रावधान था कि हरियाणा (तत्कालीन पंजाब) को पानी का दो-तिहाई हिस्सा मिलेगा, जबकि अतिरिक्त पानी होने पर दिल्ली और राजस्थान को आपूर्ति दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि बाद में 1994 में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और राजस्थान के बीच नया समझौता किया गया, जिसे उन्होंने राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 1954 का समझौता 50 वर्षों के लिए वैध था, लेकिन केंद्र के दबाव और तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण इसे समय से पहले 1994 में बदल दिया गया। संपत सिंह के अनुसार, उस समय हरियाणा का पानी का हिस्सा 8 बीसीएम से घटकर 4 बीसीएम कर दिया गया, जिसका इनेलो ने कड़ा विरोध किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि उस समय इनेलो नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने विपक्ष के नेता रहते हुए इस फैसले का विरोध किया था। बाद में 1995 में आंदोलन और पलवल रैली के दौरान 17 विधायकों ने इस्तीफा भी दिया था।
संपत सिंह ने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस ने हरियाणा के साथ धोखा किया और अब भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणा सरकार द्वारा दिल्ली में एमओयू साइन किया जा रहा है, जिसका इनेलो विरोध करती है।
उन्होंने दावा किया कि समझौते के अनुसार तीन डैम बनने थे, लेकिन वे आज तक नहीं बने, जिससे हरियाणा के हिस्से का पानी लगातार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ताजे पानी की आपूर्ति कम होने से आने वाले समय में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है।