सागर पाहवा | मोहाली
पंजाब भर में बिजली कटौती के खिलाफ मजीठा (अमृतसर), संगरूर, मानसा, पटियाला, बठिंडा, धोला, तपा, गोइंदवाल साहिब, कथूनंगल और श्री मुक्तसर साहिब सहित कई स्थानों पर किसानों द्वारा दिए जा रहे धरने, ग्रिड घेराव और चक्का जाम पावर सरप्लस पंजाब के दावों की पोल खोल रहें हैं। यह प्रतिक्रिया भारतीय जनता पार्टी मोहाली के जिला अध्यक्ष संजीव वशिष्ठ ने दी।
वशिष्ठ ने कहा कि धान की रोपाई के सीजन में पंजाब की बिजली मांग 14,000 से 16,000 मेगावाट तक पहुंच जाती है। पंजाब में लगभग 13.94 लाख कृषि ट्यूबवेल हैं, जो खेती की रीढ़ हैं, लेकिन इनके प्रयोग के लिए बिजली जरूरी है, जिसकी पूर्ति बाधित होने से किसान परेशान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को 8 घंटे बिजली देने का दावा करती रही, लेकिन केवल 3–4 घंटे की अनियमित आपूर्ति मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
संजीव वशिष्ठ ने कहा कि पंजाब के थर्मल प्लांटों की स्थिति भी सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि बिजली की कमी के कारण किसान महंगा डीजल जलाकर जनरेटर चलाने को मजबूर हो रहे हैं। एक एकड़ धान की सिंचाई का अतिरिक्त खर्च किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।