Summer express, बेंगलुरु। बेंगलुरु स्थित Capgemini कैंपस के अंदर संचालित एक डेकेयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस घटना ने खासतौर पर कामकाजी माता-पिता के बीच बच्चों की सुरक्षा और डेकेयर व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
पुलिस के अनुसार वायरल वीडियो में दो से तीन साल के छोटे बच्चों के साथ डेकेयर कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से डराने-धमकाने और शारीरिक दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
घटना के बाद कई अभिभावकों ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है। एक अभिभावक ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “काश यह वीडियो एआई से तैयार किया गया नकली वीडियो होता, लेकिन इसे देखकर मन विचलित हो गया।”
इस मामले के बाद अभिभावकों ने डेकेयर सेंटरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई मांगें उठाई हैं। माता-पिता का कहना है कि डेकेयर की गतिविधियों की लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वे ऑफिस में रहते हुए भी अपने बच्चों पर नजर रख सकें। इसके अलावा डेकेयर परिसर में प्राइवेसी जोन को छोड़कर हर जगह 24 घंटे सीसीटीवी रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने की मांग भी उठाई गई है।
अभिभावकों ने यह भी कहा कि सेंटर में केवल अधिकृत लोगों के प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यह है कि छोटे बच्चे अपने साथ हुई किसी भी परेशानी को ठीक से बता नहीं पाते। कई बार बच्चे डेकेयर जाने से डरते हैं या रोते हैं, लेकिन अभिभावक इसे सामान्य व्यवहार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाओं का समय रहते पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं और अभिभावकों का कहना है कि कंपनियों को डेकेयर सुविधाओं को केवल एक कर्मचारी सुविधा के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उनका मानना है कि अब कंपनियों और डेकेयर संचालकों को सुरक्षा मानकों की गंभीरता से समीक्षा करनी होगी, खासकर ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में कर्मचारियों को दोबारा ऑफिस बुलाया जा रहा है। यह घटना सामने आने के बाद डेकेयर सेंटरों की निगरानी व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।