Summer express/कुरुक्षेत्र/ गुरदीप सिंह गुजराल- हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की ओर से रविवार को सहायक जिला न्यायवादी (एडीए) की स्क्रीनिंग परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई। परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और नकलमुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। जिले में कुल 38 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां 10,620 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा की निगरानी के लिए छह ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए, जबकि सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
सुबह 10 बजे शुरू हुई परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों का प्रवेश सुबह 8:30 बजे से शुरू किया गया, जो 9:50 बजे तक जारी रहा। परीक्षा केंद्रों में केवल एडमिट कार्ड, पहचान पत्र और पेन ले जाने की अनुमति दी गई। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट वॉच तथा अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। सुरक्षा के मद्देनजर परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और पिपली चौक सहित प्रमुख स्थानों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की विशेष ड्यूटी लगाई गई।
परीक्षा देने के लिए विभिन्न जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की सराहना की, लेकिन बदले हुए सिलेबस और परीक्षा केंद्रों की दूरी को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की।चंडीगढ़ से आई अभ्यर्थी मनीषा ने बताया कि यह उनका दूसरा प्रयास है और उन्होंने परीक्षा की अच्छी तैयारी की है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के बाद सिलेबस में बदलाव कर दिया गया, जिससे तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला। उनके अनुसार नए सिलेबस में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा यूपीएससी स्तर के विषयों का शामिल किया गया है, जिसे केवल एक महीने में तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
फरीदाबाद से परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी मनीष ने परीक्षा केंद्र दूर मिलने पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी तय करने में समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। उनका कहना था कि आयोग को अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्र उनके निकटवर्ती जिलों में आवंटित करने चाहिए, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।फतेहाबाद से आई अभ्यर्थी ममता ने बताया कि जिस परीक्षा का आयोजन पहले नवंबर में होना था, वह अब लंबे अंतराल के बाद जुलाई में आयोजित हुई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट में मामला लंबित रहने के कारण परीक्षा में देरी हुई, जिससे तैयारी की निरंतरता प्रभावित हुई। उन्होंने नए परीक्षा पैटर्न पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विधि पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों के लिए गैर-कानूनी विषयों को शामिल करना उचित नहीं है। इसके अलावा उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर बैग रखने की समुचित व्यवस्था नहीं होने की समस्या भी उठाई और कहा कि अधिकांश अभ्यर्थियों को इस कारण असुविधा का सामना करना पड़ा।हालांकि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां पूरी तरह चाक-चौबंद रहीं, लेकिन बदले हुए सिलेबस, परीक्षा में हुई देरी, दूर स्थित परीक्षा केंद्र और मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे अभ्यर्थियों के बीच चर्चा का विषय बने रहे।