वॉशिंगटन | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को वैश्विक व्यापार पर बड़ा झटका देते हुए बांग्लादेश समेत 14 देशों पर नए टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का एलान किया है। ये टैरिफ 1 अगस्त से लागू होंगे। इस कदम के साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल मच गई है।
सभी देशों को भेजे एक जैसे पत्र
ट्रंप ने इन टैरिफ की घोषणा करते हुए संबंधित देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आधिकारिक पत्र भेजे, जिनकी भाषा और संरचना एक समान है। उन्होंने इन पत्रों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर सार्वजनिक भी किया।
जापान और दक्षिण कोरिया को सबसे पहले सूचना
भारतीय समय के अनुसार रात 9:30 बजे के बाद जापान और दक्षिण कोरिया को सबसे पहले टैरिफ लागू होने की जानकारी दी गई। इन पर 25% आयात शुल्क तय किया गया है। अन्य देशों जैसे मलेशिया, कजाखस्तान, दक्षिण अफ्रीका, लाओस और म्यांमार को बाद में सूचित किया गया।
पत्रों में स्पष्ट चेतावनी
इन पत्रों में यह भी साफ कहा गया है कि यदि कोई देश प्रतिशोध स्वरूप अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स बढ़ाता है, तो अमेरिका भी उसी तरह की जवाबी कार्रवाई करेगा।
क्यों लगाए गए टैरिफ?
ट्रंप ने कहा कि यह कदम दशकों से चले आ रहे व्यापार घाटे और अनुचित व्यापारिक नियमों को संतुलित करने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक, ये दरें अमेरिका की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में हैं।
इन देशों पर लगेगा कितना टैरिफ?
| देश | टैरिफ दर |
| म्यांमार | 40% |
| लाओस | 40% |
| थाईलैंड | 36% |
| कंबोडिया | 36% |
| बांग्लादेश | 35% |
| बोस्निया-हर्जेगोविना | 30% |
| दक्षिण अफ्रीका | 30% |
| कजाखस्तान | 25% |
| मलेशिया | 25% |
| ट्यूनीशिया | 25% |
| जापान | 25% |
| दक्षिण कोरिया | 25% |
क्या होगा आगे?
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट के अनुसार, कुल 12 देशों को पत्र भेजे जा चुके हैं और अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है। वहीं, पूर्व निर्धारित बातचीत की समयसीमा 9 जुलाई से बढ़ाकर अब 1 अगस्त तक कर दी गई है ताकि व्यापार समझौतों के लिए अधिक समय मिल सके।
संभावित असर:
अर्थव्यवस्था पर इसका तात्कालिक असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे—
- वैश्विक बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ेगी
- महंगाई में इज़ाफा हो सकता है
- विदेशी निवेश पर असर पड़ेगा
- उद्योगों में सप्लाई चेन बाधित हो सकती है
हालांकि ट्रंप का दावा है कि इससे अमेरिका में टैक्स रेवेन्यू बढ़ेगा और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इससे जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।