होशियारपुर/न्यूयॉर्क। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (एफबीआई) के गंभीर आरोपों के बाद पंजाब के होशियारपुर जिले के टांडा थाना प्रभारी (एसएचओ) गुरिंदरजीत सिंह नगरा को तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइंस भेज दिया गया है।
एफबीआई ने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने जेल में बंद गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया गिरोह से जुड़े कथित षड्यंत्र के तहत अमेरिका के लॉस एंजिलिस में रहने वाले एक भारतीय मूल के परिवार से 4 लाख डॉलर (करीब 3.4 करोड़ रुपये) मांगने का प्रयास किया। अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले में अधिकारी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने की भी बात कही है।
एफबीआई के अनुसार, पीड़ित परिवार को धमकी दी गई थी कि यदि रकम नहीं दी गई तो भारत में उनके रिश्तेदारों को एक हत्या के मामले में झूठा फंसा दिया जाएगा। अमेरिकी अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह कथित साजिश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय जग्गू भगवानपुरिया सिंडिकेट से जुड़ी थी, जो धमकी और जबरन वसूली के जरिए धन उगाही करता है। हालांकि ये आरोप अभी अमेरिकी अदालत में विचाराधीन हैं और इन पर अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है।
मामला सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने भी त्वरित कार्रवाई की।
जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने बताया कि विभाग को एफबीआई की वेबसाइट और मीडिया रिपोर्टों के जरिए जानकारी मिली। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एसएचओ को पुलिस लाइंस भेज दिया गया है। साथ ही मामले की जांच होशियारपुर से बाहर के अधिकारी को सौंपी है।
विभागीय स्तर पर होगी आगे की कार्रवाई
पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल विभाग प्राथमिक तथ्यों की जांच कर रहा है। प्रारंभिक स्तर पर उपलब्ध जानकारी मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से सामने आए दस्तावेजों पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद ही विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एफबीआई की बहुराष्ट्रीय कार्रवाई ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत सामने आया है। अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार इस अभियान में संगठित अपराध, रंगदारी, मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। एफबीआई का दावा है कि जांच में विभिन्न देशों में फैले अपराध नेटवर्क और उनसे जुड़े कथित सहयोगियों की भूमिका सामने आई है।
पंजाब पुलिस की छवि पर लगा दाग
घटना के बाद पंजाब की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे पंजाब पुलिस की छवि से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं पंजाब पुलिस का कहना है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुरूप और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण ने भारत और अमेरिका की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग, अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क तथा पुलिस तंत्र में जवाबदेही जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल सभी की नजर पंजाब पुलिस की विभागीय जांच और अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।