Summer express, नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। जून 2026 के दौरान फिंगरप्रिंट और फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से 61.1 करोड़ से अधिक यूपीआई (UPI) लेनदेन किए गए। इन ट्रांजैक्शनों का कुल मूल्य 25,416 करोड़ रुपये रहा। यह जून महीने में हुए कुल यूपीआई लेनदेन का लगभग 2.7 प्रतिशत है। पिछले वर्ष शुरू की गई यह सुविधा अब बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय होती जा रही है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की कार्यकारी निदेशक सोहिनी राजोला ने कहा कि बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन के बढ़ते उपयोग से यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता अब अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान प्रणाली को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई बैंक और प्रमुख यूपीआई ऐप अपने ग्राहकों को फिंगरप्रिंट और फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध करा चुके हैं तथा आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ने की उम्मीद है।
एनपीसीआई के अनुसार, बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन से यूपीआई पिन पर निर्भरता कम होती है, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज और सहज बनती है। इसके साथ ही ट्रांजैक्शन की सफलता दर में भी सुधार देखा गया है। यह सुविधा व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) दोनों प्रकार के डिजिटल भुगतान में प्रभावी साबित हो रही है।
देश के प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म जैसे फोनपे, एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड (NBSL) का भीम ऐप, क्रेड और विभिन्न बैंकिंग ऐप्स ने अपने उपयोगकर्ताओं के लिए बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा शुरू कर दी है। इससे यूजर्स अब यूपीआई पिन दर्ज करने के बजाय अपने फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान के जरिए सुरक्षित तरीके से भुगतान कर सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, प्रत्येक डिजिटल भुगतान में कम से कम दो स्तर के प्रमाणीकरण (ऑथेंटिकेशन) आवश्यक होते हैं। यूपीआई लेनदेन में इनमें से कम से कम एक प्रमाणीकरण कारक का डायनामिक होना अनिवार्य है। ऐसे में बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन न केवल सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि डिजिटल भुगतान को पहले से अधिक तेज, आसान और भरोसेमंद भी बनाता है।