Summer express/मंडी, धर्मवीर-:मंडी और बिलासपुर की सीमा पर स्थित 800 मेगावाट क्षमता वाले एनटीपीसी कोलडैम हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट ने मानसून के दौरान भारी गाद और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों के बावजूद बिजली उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। परियोजना अब चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। यह जानकारी एनटीपीसी कोलडैम के महाप्रबंधक एस.एस. राव ने मीडिया संवाद-2026 के दौरान दी।उन्होंने बताया कि सतलुज नदी में मानसून के समय सिल्टेशन की समस्या गंभीर रहती है, लेकिन बेहतर तकनीकी प्रबंधन, सुरक्षा मानकों और टीमवर्क की बदौलत परियोजना का संचालन बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रखा गया। पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदा के दौरान भी बांध और पावर हाउस को सुरक्षित रखते हुए बिजली उत्पादन बनाए रखा गया, जबकि इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
एस.एस. राव ने कहा कि एनटीपीसी केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल योजनाएं, स्कूलों के बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण तथा महिलाओं और युवाओं के लिए कौशल विकास एवं स्वरोजगार कार्यक्रम भी संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के समग्र विकास को कंपनी अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानती है।भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एनटीपीसी ने हिमाचल प्रदेश के मंडी और सोलन जिलों में दो नई पंप्ड स्टोरेज पावर परियोजनाओं की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश की बिजली आपूर्ति को और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी एनटीपीसी ने महत्वपूर्ण पहल की है। एस.एस. राव ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए आईआईटी मुंबई के सहयोग से कोलडैम परियोजना और इसके आसपास के क्षेत्र में विस्तृत अध्ययन शुरू किया जा रहा है। इस अध्ययन से भविष्य में संभावित पर्यावरणीय चुनौतियों का बेहतर आकलन कर प्रभावी रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।एनटीपीसी का कहना है कि बिजली उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास के बीच संतुलन बनाकर कंपनी हिमाचल प्रदेश के सतत विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।