समर न्यूज | चंडीगढ़
कोटकपूरा और बहबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों की लंबित जांच को लेकर पंजाब पुलिस ने चंडीगढ़ की अदालत में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट पेश की है। अभियोजन पक्ष ने रिपोर्टें सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष रखीं। अदालत ने रिपोर्टों को देखने के बाद उन्हें दोबारा सीलबंद रखने और सुरक्षित अभिरक्षा में रखने का निर्देश दिया।
ये मामले 2015 में बरगाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के बाद हुए पुलिस गोलीकांड से जुड़े हैं। 14 अक्टूबर 2015 को कोटकपूरा में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान कई लोग घायल हुए थे, जबकि बहबल कलां में हुई पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हुई थी।
अप्रैल 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश के बाद कोटकपूरा फायरिंग और संपत्ति नुकसान से जुड़े मुकदमों की सुनवाई फरीदकोट से चंडीगढ़ की सत्र अदालत में स्थानांतरित की गई थी। अदालत ने लंबित जांच की स्थिति स्पष्ट करने के लिए अभियोजन से रिपोर्ट मांगी थी।
अदालत ने मांगी थी रिपोर्ट: पिछली सुनवाई में अदालत ने अभियोजन पक्ष को लंबित जांच के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके अनुपालन में एक अगस्त को रिपोर्टें अदालत में पेश की गईं। अतिरिक्त लोक अभियोजक ने मामले की संवेदनशीलता और प्रकृति को देखते हुए रिपोर्टों को सीलबंद रखने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इन मामलों में पंजाब पुलिस के कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आरोपी हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी कोटकपूरा फायरिंग मामले में आरोपी हैं। अदालत में लंबित जांच और मुकदमे की अगली प्रक्रिया अब सीलबंद रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों तथा अदालत के निर्देशों के आधार पर आगे बढ़ेगी।