Summer express, सिरसा। सिरसा में सफाई कर्मचारियों की 17 दिनों से जारी हड़ताल शनिवार को उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब शहर में जमा कचरे को उठाने पहुंची जिला प्रशासन की टीम और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने करीब 40 सफाई कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद सफाई कर्मचारियों में रोष फैल गया। कर्मचारियों ने अपने साथियों की गिरफ्तारी के विरोध में सिटी थाना पहुंचकर घेराव किया और थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 17 दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से हड़ताल कर रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार, सरकार की ओर से पहले किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि शनिवार को प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में कचरा उठाने की कोशिश की, जिसका कर्मचारियों ने विरोध किया। इसी दौरान दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया और कई कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया गया।
सफाई कर्मचारी राजेश ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बातचीत के बजाय जबरन सफाई व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक हिरासत में लिए गए साथियों को रिहा नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक सिटी थाने के बाहर उनका धरना जारी रहेगा।
वहीं, 17 दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सिरसा शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से कचरा उठाने की कोशिश के बाद कर्मचारियों के साथ टकराव की स्थिति पैदा होने से मामला और गंभीर हो गया है।
फिलहाल सिटी थाने के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। कर्मचारियों के धरने के चलते इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। अब प्रशासन के सामने एक ओर शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर हड़ताली कर्मचारियों के साथ बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने की जिम्मेदारी भी है।