समर न्यूज | बरनाला
बरनाला जिले के धौला गांव स्थित एक औद्योगिक इकाई पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोपों की जांच अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की निगरानी में होगी। शिकायत पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, बरनाला के मंडल वन अधिकारी और उपायुक्त के प्रतिनिधियों वाली संयुक्त समिति गठित की है। समिति को मौके का निरीक्षण कर आठ सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
शिकायत में फतेहगढ़ छन्ना रोड पर धौला के पास स्थित औद्योगिक इकाई के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें रास्ता बनाने के लिए सात पूरी तरह विकसित पेड़ों को कथित रूप से बिना अनुमति काटना, औद्योगिक कचरे को खुले में जलाना, बिना अनुमति भूजल निकालना, बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट को छोड़ना और अनिवार्य हरित पट्टी विकसित नहीं करना शामिल है। एनजीटी ने फिलहाल इन आरोपों को सही नहीं माना है, बल्कि संबंधित एजेंसियों को मौके पर जाकर तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।
{प्रदूषण बोर्ड ने पहले भी भेजा था नोटिस: मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही संबंधित इकाई को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है। यह नोटिस फरवरी में जारी किया गया था। इसमें खुले में कचरा जलाने और पर्याप्त पौधारोपण नहीं किए जाने समेत कुछ पर्यावरणीय उल्लंघनों का उल्लेख किया गया था। अब एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति इन आरोपों की मौके पर जांच करेगी और यह भी देखेगी कि पहले उठाई गई आपत्तियों पर इकाई की ओर से क्या कदम उठाए गए। इस मामले में पर्यावरण संबंधी शिकायतें नई नहीं हैं। एनजीटी के पुराने मामलों में भी बरनाला के फतेहगढ़ छन्ना-धौला क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट, भूजल और वायु प्रदूषण को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2024 के एक मामले में भी फतेहगढ़ छन्ना स्थित एक रासायनिक एवं औषधि इकाई पर भूमिगत बोर के जरिये औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने से भूजल प्रभावित होने का आरोप लगाया गया था। एनजीटी के रिकॉर्ड में इस मामले से संबंधित इकाई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य सरकारी एजेंसियों को पक्षकार
बनाया गया था।
{पेड़ों की कटाई पर भी उठे सवाल
बरनाला जिले में पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता पहले भी चिंता जता चुके हैं। जून में धौला और धुरकोट को जोड़ने वाली सड़क के आसपास बड़ी संख्या में पुराने पेड़ों की कथित कटाई का मामला सामने आया था। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सड़क निर्माण से पहले पेड़ों को आवश्यक अनुमति के बिना काटा गया। हालांकि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने उस समय पेड़ काटने से इनकार करते हुए कहा था कि निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ है और मामले की जांच कराई जाएगी। मौजूदा मामले में सात पेड़ों की कटाई का आरोप इसी व्यापक पर्यावरणीय शिकायत का एक अलग पहलू है। इसलिए संयुक्त समिति की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पेड़ों को किसने और किन परिस्थितियों में काटा तथा इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।
{भूजल और अपशिष्ट की भी होगी जांच: शिकायतकर्ताओं ने फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट और भूजल दोहन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों के दौरान बिना उपचारित पानी छोड़ा गया और भूजल का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया। एनजीटी ने इन आरोपों की पुष्टि या खंडन नहीं किया है। समिति के स्थल निरीक्षण और संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। क्षेत्र में पहले भी औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों पर सरकारी समितियां जांच कर चुकी हैं। पुराने एनजीटी रिकॉर्ड में भी धौला और फतेहगढ़ छन्ना क्षेत्र में औद्योगिक अपशिष्ट, भूजल और वायु प्रदूषण संबंधी शिकायतों का उल्लेख मिलता है। इससे मौजूदा जांच का महत्व
बढ़ जाता है।
{आठ सप्ताह में रिपोर्ट: अब संयुक्त समिति को मौके पर जाकर सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच करनी है। इसमें पेड़ों की कटाई, कचरा जलाने, भूजल निकासी, अपशिष्ट निपटान और हरित पट्टी की स्थिति जैसे पहलुओं को देखा जाएगा। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है। फिलहाल एनजीटी ने 30 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है।
{पर्यावरणीय अनुपालन पर नजर: मले ने औद्योगिक इकाइयों के लिए पर्यावरणीय मंजूरियों और निर्धारित मानकों के पालन की निगरानी का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संयुक्त समिति की जांच में आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं और यदि उल्लंघन पाए जाते हैं तो संबंधित विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां क्या कार्रवाई करती हैं।