सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक पार्षद ने उठाया मामला
लक्की मेहता | लुधियाना
समर न्यूज
नगर निगम के ट्यूबवेलों की मरम्मत और रखरखाव को लेकर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। वार्ड नंबर 83 की पार्षद मोनिका देविंदर जग्गी पिछले करीब 11 महीने से खराब ट्यूबवेलों और तय समय में मरम्मत न करने वाले ठेकेदार का मामला लगातार उठा रही हैं।
पार्षद ने निगम कमिश्नर को तीन अलग-अलग मौकों पर पत्र लिखकर ठेकेदार पर पेनल्टी लगाने की मांग की, लेकिन उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मामला पहली बार 11 सितंबर 2025 को उठाया गया था। निगम के एसडीओ (ओएंडएम), जोन-ए1 को भेजे पत्र में पार्षद ने आरोप लगाया कि वार्ड के ट्यूबवेल खराब होने के बाद ठेकेदार समझौते में तय समय के भीतर उनकी मरम्मत नहीं कर रहा। इसका सीधा असर इलाके की पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है।
{कहीं 48 घंटे, कहीं 50 घंटे… और एक ट्यूबवेल तो चालू ही नहीं हुआ: पार्षद के पत्र के अनुसार शमशान घाट ट्यूबवेल की खराबी 24 अगस्त 2025 को दर्ज की गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद वह उस समय तक चालू नहीं हुआ था।
वहीं खन्ना कुआं ट्यूबवेल की खराबी 5 सितंबर को दर्ज हुई और 7 सितंबर को ठीक की गई। यानी करीब 48 घंटे का समय लगा। इसी तरह धोबी घाट ट्यूबवेल की खराबी 8 सितंबर को दर्ज हुई और 10 सितंबर को ठीक की गई, जिसमें करीब 50 घंटे लग गए। पार्षद का कहना था कि जब ठेकेदार को मरम्मत के लिए समयसीमा तय करके जिम्मेदारी दी गई है तो उससे अधिक समय लेने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेनल्टी क्यों नहीं लगाई जा रही?
{फरवरी में फिर शिकायत, आरोप-कार्रवाई में अधिकारियों की रुचि नहीं: मामला उठाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर पार्षद ने 13 फरवरी 2026 को निगम कमिश्नर को दोबारा पत्र भेजा। इसमें उन्होंने पिछली शिकायत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अधिकारी ठेकेदार को दंडित करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने कमिश्नर से हस्तक्षेप कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
{अगस्त में फिर वही कहानी, 10 दिन बाद भी समस्या पूरी तरह दूर नहीं: इसके बाद 5 अगस्त 2026 को पार्षद ने एक और पत्र निगम कमिश्नर को भेजा। इस बार मामला गौशाला स्थित ट्यूबवेल का था। पार्षद के मुताबिक इसकी खराबी की सूचना 25 जुलाई को दी गई थी, जबकि 4 अगस्त को इसे केवल आंशिक रूप से ठीक किया गया। यानी करीब 10 दिन बाद भी समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई।
{समयसीमा टूटने पर पेनल्टी क्यों नहीं : पार्षद ने सवाल उठाया कि जब ठेकेदार को तय समय के भीतर ट्यूबवेल ठीक करने की जिम्मेदारी दी गई है तो बार-बार देरी के बावजूद उसके खिलाफ पेनल्टी क्यों नहीं लगाई जा रही।
उनका आरोप है कि समय पर कार्रवाई न होने से न केवल लोगों को पानी की समस्या झेलनी पड़ती है, बल्कि निगम के साथ हुए समझौते की शर्तों का पालन कराने पर भी सवाल खड़े होते हैं। 11 सितंबर 2025 से 5 अगस्त 2026 तक तीन बार शिकायतें सामने आने के बावजूद यदि ठेकेदार पर
कार्रवाई नहीं हुई है तो सवाल सिर्फ ट्यूबवेलों की मरम्मत का नहीं, बल्कि निगम के अनुबंधों की निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही का भी है।