एनएफएचएस-5 में कई मानकों पर राष्ट्रीय औसत से बेहतर पंजाब, लेकिन 71.1 प्रतिशत
छोटे बच्चे एनीमिया से प्रभावित; आहार में वसा की अधिकता भी चिंता का कारण
समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब को अक्सर देश के अपेक्षाकृत समृद्ध राज्यों में गिना जाता है, लेकिन पोषण के मोर्चे पर तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बच्चों में ठिगनापन, दुबलापन और कम वजन जैसे कुपोषण के प्रमुख संकेतकों में पंजाब की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
दूसरी ओर, बच्चों और महिलाओं में एनीमिया की ऊंची दर तथा आहार में वसा की अधिक मात्रा राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार ने अभी तक ऐसा कोई अंतिम, आधिकारिक राष्ट्रीय पोषण इंडेक्स सार्वजनिक नहीं किया है, जिसमें राज्यों की समग्र रैंकिंग दी गई हो। इसलिए पंजाब की स्थिति का आकलन अलग-अलग पोषण मानकों के आधार पर किया जाना अधिक उचित है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एनएफएचएस-5 (2019-21) आंकड़ों के अनुसार पंजाब में पांच साल से कम उम्र के 24.5 प्रतिशत बच्चे ठिगनेपन यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या से प्रभावित थे। 10.6 प्रतिशत बच्चे दुबलेपन और 16.9 प्रतिशत बच्चे कम वजन की श्रेणी में थे। राष्ट्रीय स्तर पर ये आंकड़े क्रमश: 35.5, 19.3 और 32.1 प्रतिशत थे।
यानी तीनों प्रमुख संकेतकों में पंजाब राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में था। पंजाब के लिए यह स्थिति पिछले सर्वेक्षण की तुलना में भी कुछ सुधार दिखाती है। एनएफएचएस-4 में ठिगनेपन की दर 25.7 प्रतिशत, दुबलेपन की 15.6 प्रतिशत और कम वजन की 21.6 प्रतिशत थी। हालांकि ठिगनेपन में सुधार सीमित रहा, जबकि दुबलेपन और कम वजन में अपेक्षाकृत स्पष्ट कमी दर्ज हुई। छह से 23 महीने के बच्चों के लिए पर्याप्त आहार मिलने की स्थिति भी चिंता का विषय है। इस आयु वर्ग के केवल 11.9 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त आहार मिल रहा था।
आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाले अपेक्षाकृत ताजा आंकड़े भी पंजाब को कई पड़ोसी राज्यों से बेहतर स्थिति में दिखाते हैं। जून 2025 के पोषण ट्रैकर आंकड़ों में पंजाब में पांच साल तक के बच्चों में 17.14 प्रतिशत ठिगने, 2.95 प्रतिशत दुबले और 5.12 प्रतिशत कम वजन वाले दर्ज किए गए। हालांकि इन आंकड़ों की तुलना सीधे एनएफएचएस से नहीं की जा सकती, क्योंकि पोषण ट्रैकर में आंगनवाड़ी में पंजीकृत और मापे गए बच्चों का ही आंकड़ा शामिल होता है।
पोषण के दूसरे महत्वपूर्ण मानक एनीमिया में पंजाब की स्थिति कमजोर है। एनएफएचएस-5 के अनुसार छह से 59 महीने के 71.1 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से प्रभावित थे। 15 से 49 वर्ष की 58.7 प्रतिशत महिलाएं भी एनीमिया की शिकार थीं। गर्भवती महिलाओं में यह दर 51.7 प्रतिशत रही। यह बताता है कि केवल पर्याप्त भोजन उपलब्ध होना पोषण की अच्छी स्थिति की गारंटी नहीं है; भोजन में आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की पर्याप्तता भी जरूरी है।
कुल मिलाकर पंजाब को बच्चों के ठिगनेपन, दुबलेपन और कम वजन के मामले में देश के कई राज्यों से बेहतर स्थिति वाला राज्य कहा जा सकता है, लेकिन इसे पोषण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य मानना जल्दबाजी होगी। एनीमिया, छोटे बच्चों को पर्याप्त विविध आहार न मिलना, बढ़ता मोटापा और अधिक वसा वाला भोजन ऐसे क्षेत्र हैं जहां सुधार की जरूरत है। उपलब्ध आंकड़े यह भी बताते हैं कि पंजाब में चुनौती अब केवल “कितना भोजन” नहीं, बल्कि “कितना पौष्टिक और संतुलित भोजन” है।
भोजन में कैलोरी से ज्यादा गुणवत्ता का सवाल
ताजा सरकारी पोषण उपभोग रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में ग्रामीण आबादी की औसत प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कैलोरी खपत करीब 2,300 किलो कैलोरी और शहरी आबादी में करीब 2,365 किलो कैलोरी रही। प्रोटीन की खपत भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। लेकिन राज्य में वसा का सेवन काफी ऊंचा है। 2023-24 में ग्रामीण पंजाब में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति करीब 75.4 ग्राम और शहरी पंजाब में 80.9 ग्राम वसा की खपत दर्ज हुई, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य की चुनौती अब केवल भोजन की उपलब्धता नहीं, बल्कि संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार की भी है।
मोटापा भी उभरती चुनौती
एनएफएचएस-5 में 15 से 49 वर्ष की महिलाओं में 40.8 प्रतिशत और पुरुषों में 32.2 प्रतिशत अधिक वजन या मोटापे की स्थिति दर्ज हुई। महिलाओं में कम वजन की दर 12.7 प्रतिशत और पुरुषों में 12.5 प्रतिशत थी। यानी पंजाब में कुपोषण का स्वरूप दोहरा हो रहा है—एक तरफ बच्चों और महिलाओं में एनीमिया तथा कुछ वर्गों में पोषण की कमी है, वहीं दूसरी तरफ अधिक वजन और वसा की समस्या बढ़ रही है।
योजनाओं से निगरानी मजबूत
केंद्र सरकार ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण-2.0 के तहत पोषण ट्रैकर को निगरानी का प्रमुख डिजिटल माध्यम बनाया है। इसमें बच्चों की लंबाई और वजन, ठिगनेपन, दुबलेपन और कम वजन के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं, गर्म पका भोजन और घर ले जाने वाले राशन की निगरानी की जा रही है। मार्च और अगस्त 2026 में सरकार ने भी स्पष्ट किया कि पोषण ट्रैकर से राज्यों को लगभग वास्तविक समय में पोषण संबंधी आंकड़ों की निगरानी और सुधारात्मक कार्रवाई में मदद मिल रही है।
पंजाब में खर्च और व्यवस्था
पंजाब में पोषण सेवाओं के लिए केंद्र से भी पर्याप्त वित्तीय सहायता मिली है। 2024-25 में मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण-2.0 के तहत पंजाब के लिए 265.48 करोड़ रुपये जारी किए गए। आंगनवाड़ी केंद्रों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करने और एनीमिया से निपटने के लिए फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति भी की जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार भोजन की गुणवत्ता की जांच और नमूनों के परीक्षण की व्यवस्था भी की गई है। राज्य का प्रदर्शन अलग-अलग मानकों पर अलग है—बाल कुपोषण में अपेक्षाकृत बेहतर, लेकिन एनीमिया और आहार गुणवत्ता में चिंता वाला। सरकार के पोषण ट्रैकर से मिलने वाले नए आंकड़े आने वाले वर्षों में राज्य की वास्तविक प्रगति को अधिक नियमित रूप से मापने में मदद कर सकते हैं।