एजेंसी। देहरादून
उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने की प्रक्रिया नए ढांचे के तहत आगे बढ़ रही है। राज्य के 26 अल्पसंख्यक संस्थानों को औपचारिक मान्यता देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दो सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में इन संस्थानों के प्रतिनिधियों को मान्यता प्रमाण पत्र सौंपेंगे।
यह पहल उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था के तहत हो रही है। राज्य सरकार ने एक जुलाई से मदरसा शिक्षा बोर्ड की जगह इस प्राधिकरण को लागू किया है। अब मुस्लिम समुदाय के साथ सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों के शिक्षण संस्थान भी इसी व्यवस्था के दायरे में आते हैं। मान्यता के लिए प्राप्त आवेदनों और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद 26 संस्थानों को पात्र पाया गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, इससे पहले प्राधिकरण अपने शुरुआती चरण में सात मदरसों समेत नौ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता दे चुका है। इसके बाद अब 26 और संस्थानों को मान्यता देने की तैयारी है।
{नई व्यवस्था का उद्देश्य
नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करना है। मान्यता के लिए संस्थानों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। नई व्यवस्था में संस्थानों को राज्य की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने और विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा उपलब्ध कराने पर भी जोर है।
राज्य में बड़ी संख्या में मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत मान्यता लेनी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि जिन संस्थानों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है।
{सभी समुदायों के संस्थान दायरे में
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत अब मान्यता की व्यवस्था किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण को सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थानों की मान्यता और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए एक समान प्रशासनिक ढांचा तैयार हुआ है।