तरनतारन में 22 वर्षीय युवक की हत्या ने फिर बढ़ाई चिंता
जुलाई में फरीदकोट में युवती की हत्या का मामला, 2025 में अमृतसर में बेटी और उसके प्रेमी की हत्या से भी दहला था राज्य
समर न्यूज | तरनतारन
पंजाब में पसंद की शादी और पारिवारिक असहमति से जुड़े खूनी विवादों का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। तरनतारन में 22 वर्षीय जगजीत सिंह जीत की कथित तौर पर ‘ऑनर किलिंग’ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर परिवार की तथाकथित ‘इज्जत’ के नाम पर युवाओं की जिंदगी लेने की मानसिकता कब खत्म होगी। ताजा मामले में पुलिस के अनुसार, लड़की के भाइयों ने तरनतारन बस स्टैंड के बाहर जगजीत पर तेजधार हथियार से हमला कर दिया। एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, जगजीत तरनतारन के कडगिल गांव का रहने वाला था। करीब एक महीने पहले उसने कथित तौर पर नौैरंगाबाद की एक युवती से परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी की थी। जांच के मुताबिक, युवती के भाई जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सा और हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी ने उसे बस स्टैंड के पास घेरा और हमला किया। पुलिस के मुताबिक उसके सिर और चेहरे पर तेजधार हथियार से वार किए गए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और हत्या के पीछे के पूरे घटनाक्रम तथा आरोपियों की भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इस घटना को महज पारिवारिक विवाद मानकर छोड़ देना कई बड़े सवालों को नजरअंदाज करना होगा। पंजाब में पिछले वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें प्रेम संबंध या परिवार की सहमति के बिना विवाह के बाद युवाओं को निशाना बनाया गया। चिंता इसलिए भी गंभीर है कि कई मामलों में पीड़ितों को परिवार से खतरा होने के बावजूद सुरक्षा हासिल नहीं हो पाती या विवाद हिंसक रूप लेने के बाद पुलिस तक पहुंचता है।
जुलाई 2026 में फरीदकोट जिले में 20 वर्षीय महकप्रीत कौर की हत्या का मामला भी सामने आया था। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे संभावित ‘ऑनर किलिंग’ माना। महकप्रीत ने चार मई को अपने गांव के जगदीप सिंह से विवाह किया था। आरोप है कि परिवार इस विवाह से नाराज था। पुलिस के अनुसार, कोटकपूरा के पास अमृतसर-बठिंडा राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट उसे कथित तौर पर परिवार के सदस्यों ने रोका, जबकि उसका पति वहां से भाग निकलने में सफल रहा। बाद में युवती का शव खेत से बरामद हुआ। मामले में जांच और आरोपियों की तलाश की गई।
अमृतसर में बेटी और प्रेमी की हत्या
जून 2025 में अमृतसर जिले में 22 वर्षीय सुखप्रीत कौर और उसके 24 वर्षीय प्रेमी जॉबनदीप सिंह की हत्या ने भी पंजाब को झकझोर दिया था। पुलिस के अनुसार, दोनों परिवार की इच्छा के खिलाफ शादी करना चाहते थे और अदालत परिसर तक पहुंच गए थे। बाद में युवती के परिवार के लोग उन्हें वापस घर ले गए। आरोप है कि वहां दोनों की हत्या कर दी गई। मामले में युवती के पिता को गिरफ्तार किया गया था।
तरनतारन का पुराना जख्म
तरनतारन में ही सितंबर 2019 में अमनप्रीत कौर और अमनदीप सिंह की हत्या का मामला सामने आया था। दोनों ने परिवार की इच्छा के खिलाफ विवाह किया था। पुलिस के अनुसार, मोटरसाइकिल से लौट रहे दंपती को महिला के रिश्तेदारों ने कथित तौर पर घेरा। गोली मारने के बाद वाहन से कुचलने का भी आरोप लगा था। मामले में महिला के कई रिश्तेदारों समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद की जांच में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई।
पुराने मामलों से नहीं लिया सबक
इससे पहले 2009 में तरनतारन जिले में बालकर सिंह और रविंदर पाल कौर की हत्या भी कथित ‘ऑनर किलिंग’ के रूप में सामने आई थी। दोनों ने परिवार की इच्छा के खिलाफ अदालत में विवाह किया था और सुरक्षा के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा संबंधी निर्देश के बावजूद दोनों की हत्या कर दी गई। यह मामला लंबे समय से पंजाब में ऐसे अपराधों की गंभीरता का उदाहरण रहा है।
कानून से ऊपर ‘इज्जत’ नहीं
कानून और सामाजिक विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवार की सहमति के बिना विवाह को क्या अब भी कुछ लोग हिंसा का औचित्य मानते हैं। भारतीय कानून में किसी व्यक्ति को अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार है और परिवार की प्रतिष्ठा इस अधिकार से ऊपर नहीं हो सकती। ऐसे मामलों में पुलिस की शुरुआती भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। धमकी की शिकायत मिलने पर समय रहते सुरक्षा, जोखिम का आकलन और परिवार के दबाव की निगरानी किसी संभावित अपराध को रोक सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा
तरनतारन की ताजा घटना यह भी बताती है कि केवल हत्या के बाद गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि अंतरजातीय या परिवार की इच्छा के खिलाफ विवाह करने वाले दंपतियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और खतरे की स्थिति में उन्हें प्रभावी सुरक्षा मिले। साथ ही गांव और परिवार स्तर पर ऐसी मानसिकता के खिलाफ सामाजिक जागरूकता जरूरी है, जिसमें विवाह के फैसले को ‘इज्जत’ से जोड़कर हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश की जाती है। पंजाब में बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के सामने भी एक कठिन सवाल छोड़ रहे हैं- क्या किसी परिवार की कथित प्रतिष्ठा किसी युवा की जिंदगी से बड़ी हो सकती है?