Facebook-f Youtube Summer Express - Header One X-twitter

पंजाब में बदल रही जनसांख्यिकी, घट रही सिख आबादी की हिस्सेदारी

कम प्रजनन दर और विदेश पलायन आबादी में कमी के प्रमुख कारण
समर न्यूज | चंडीगढ़

पंजाब की जनसांख्यिकी में पिछले तीन दशकों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों के अनुसार राज्य की कुल आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी लगातार घटी है। 1991 में सिख आबादी राज्य की कुल आबादी का 62.95 प्रतिशत थी, जो 2001 में घटकर 59.9 प्रतिशत और 2011 में 57.7 प्रतिशत रह गई। इसके विपरीत
हिंदू आबादी की हिस्सेदारी इसी अवधि में 34.46 प्रतिशत से बढ़कर 36.9 प्रतिशत और फिर 38.5 प्रतिशत हुई।
जनगणना के आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश में सिख आबादी की वृद्धि दर में लगातार गिरावट आई है। 1991 में सिख आबादी की दशकीय वृद्धि दर 24.3 प्रतिशत थी। 2001 में यह 18.2 प्रतिशत और 2011 में केवल 8.4 प्रतिशत रह गई। 2011 की जनगणना में देश में सिखों की संख्या करीब 2.08 करोड़ दर्ज की गई थी।
पंजाब में सिख आबादी की हिस्सेदारी घटने के पीछे कम प्रजनन दर को प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार पंजाब में कुल प्रजनन दर करीब 1.6 बच्चे प्रति महिला है, जो 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से काफी कम है। धार्मिक आधार पर देखें तो सर्वेक्षण में सिख महिलाओं की प्रजनन दर 1.62 बच्चे प्रति महिला दर्ज हुई। यह हिंदू महिलाओं की 1.62 के लगभग बराबर और ईसाई महिलाओं की 1.79 से कम है।
विशेषज्ञों के अनुसार शिक्षा का बढ़ता स्तर, विवाह में देरी, छोटे परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति और महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक भागीदारी जैसे कारण भी प्रजनन दर को प्रभावित कर रहे हैं। पंजाब में महिलाओं की औसत शादी की उम्र भी कई अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। ऐसे में परिवार छोटा रखने की प्रवृत्ति का असर आने वाली पीढ़ियों की आबादी पर पड़ना स्वाभाविक है।
विदेश पलायन भी बड़ी वजह
पंजाब की बदलती जनसांख्यिकी में विदेश पलायन को भी महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। खासकर युवा सिखों का कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों की ओर जाना लंबे समय से जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण पंजाब, विशेषकर कृषि से जुड़े परिवारों में विदेश जाने की प्रवृत्ति ने युवा आबादी की संरचना को प्रभावित किया है। हालांकि विदेश जाने वाले सभी लोग स्थायी रूप से राज्य से बाहर नहीं रहते और कई लोग बाद में लौटते भी हैं, इसलिए पलायन को अकेले जनसंख्या हिस्सेदारी में बदलाव का कारण मानना उचित नहीं होगा। पंजाब में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की संख्या भी जनसांख्यिकीय बदलाव में भूमिका निभा रही है। औद्योगिक, निर्माण, कृषि और सेवा क्षेत्र में रोजगार के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित कई राज्यों से लोग पंजाब आते हैं। हालांकि इनके धर्मवार आंकड़ों को लेकर वर्तमान में नई आधिकारिक जनगणना उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस बदलाव के सटीक धार्मिक प्रभाव का आकलन नई जनगणना के आंकड़े आने के बाद ही किया जा सकेगा।
धार्मिक और सामाजिक
संस्थाओं पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिख आबादी की वृद्धि दर लंबे समय तक इसी तरह कम रहती है तो इसका प्रभाव केवल जनसंख्या के अनुपात तक सीमित नहीं रहेगा। धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और चुनावी राजनीति में युवा आबादी की भागीदारी भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि किसी समुदाय की राजनीतिक या सामाजिक ताकत केवल उसकी आबादी के प्रतिशत से तय नहीं होती। शिक्षा, आर्थिक स्थिति, संस्थागत प्रभाव, प्रवासी समुदाय से संबंध और राजनीतिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण कारक हैं।
अपीलों के बावजूद मुद्दा जटिल
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज की ओर से सिख दंपतियों से तीन-चार बच्चे पैदा करने की अपील भी की गई है। इससे पहले भी विभिन्न जत्थेदार छोटे होते परिवारों और सिख आबादी की वृद्धि दर पर चिंता जता चुके हैं। हालांकि जनसंख्या विशेषज्ञों के अनुसार केवल अधिक बच्चे पैदा करने की अपील से इस प्रवृत्ति को पलटना आसान नहीं है। इसके लिए रोजगार, शिक्षा, आवास, परिवार की आर्थिक क्षमता और युवाओं के विदेश जाने जैसे व्यापक सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को समझना होगा।
नई जनगणना से और
स्पष्ट होगी तस्वीर
2011 के बाद भारत में धर्मवार विस्तृत जनगणना आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना के संबंध में स्पष्ट किया है कि प्रत्येक व्यक्ति से उसकी बताई गई धार्मिक पहचान दर्ज की जाएगी। इसलिए पंजाब में सिख, हिंदू और अन्य समुदायों की वर्तमान हिस्सेदारी का वास्तविक आकलन नई जनगणना के आंकड़े आने के बाद ही संभव होगा। पंजाब की जनसांख्यिकीय तस्वीर में बदलाव को केवल किसी एक समुदाय की वृद्धि या कमी के रूप में देखना अधूरा होगा। कम प्रजनन दर, शिक्षा, शहरीकरण, विदेश पलायन और दूसरे राज्यों से आंतरिक प्रवास—ये सभी मिलकर राज्य की आबादी की संरचना बदल रहे हैं। ऐसे में 2027 की जनगणना पंजाब के सामाजिक और जनसांख्यिकीय बदलाव की नई तस्वीर सामने रखेगी।

admin

Horizonbeg@gmail.com https://summerexpress.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

पंजाब में बदल रही जनसांख्यिकी, घट रही सिख आबादी की हिस्सेदारी

कम प्रजनन दर और विदेश पलायन आबादी में कमी के प्रमुख कारणसमर न्यूज | चंडीगढ़ पंजाब की जनसांख्यिकी में पिछले तीन दशकों के दौरान महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों के अनुसार राज्य की कुल आबादी में सिख समुदाय की हिस्सेदारी लगातार घटी है। 1991 में सिख आबादी राज्य की कुल आबादी का...

नहरों तक पानी पहुंचने से पंजाब में भूजल संकट पर कुछ राहत, खतरा अब भी गंभीर

समर न्यूज | चंडीगढ़ पंजाब के भूजल संकट के बीच नई आकलन रिपोर्ट कुछ राहत के संकेत दे रही है। राज्य में भूजल के अत्यधिक दोहन वाले ब्लॉकों की संख्या दो साल में 115 से घटकर 110 रह गई है। 153 आकलन इकाइयों में अब 110 ब्लॉक अतिदोहित, छह गंभीर, 17 अर्ध-गंभीर और 20 सुरक्षित...

पंजाब में बच्चों में कुपोषण कम पर बढ़ रही एनीमिया की चुनौती

एनएफएचएस-5 में कई मानकों पर राष्ट्रीय औसत से बेहतर पंजाब, लेकिन 71.1 प्रतिशतछोटे बच्चे एनीमिया से प्रभावित; आहार में वसा की अधिकता भी चिंता का कारण समर न्यूज | चंडीगढ़ पंजाब को अक्सर देश के अपेक्षाकृत समृद्ध राज्यों में गिना जाता है, लेकिन पोषण के मोर्चे पर तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। उपलब्ध सरकारी...

हिमाचल में 650 चिकित्सकों की होगी भर्ती : सीएम सुक्खू

समर न्यूज। हमीरपुरहिमाचल प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 650 चिकित्सकों की भर्ती करेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हमीरपुर जिले के नादौन क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर के उद्घाटन के दौरान यह घोषणा की। प्रस्तावित भर्ती में 300 चिकित्सा अधिकारी, 200 विशेषज्ञ चिकित्सक और 150 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर शामिल हैं। सरकार का...

उत्तराखंड में 26 अल्पसंख्यक संस्थानों को मिलेगी मान्यता, मुख्यमंत्री धामी दो सितंबर को सौंपेंगे प्रमाण पत्र

एजेंसी। देहरादून उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने की प्रक्रिया नए ढांचे के तहत आगे बढ़ रही है। राज्य के 26 अल्पसंख्यक संस्थानों को औपचारिक मान्यता देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दो सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में इन संस्थानों के प्रतिनिधियों को मान्यता प्रमाण पत्र सौंपेंगे।यह पहल उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक...
Summer Express - header one

हम लाते हैं तेज़, साफ़ और भरोसेमंद ख़बरें — शोर के बीच भी सच्चाई तक पहुंचाने वाली।
चाहे ब्रेकिंग न्यूज़ हो या आपके लिए अहम कहानियाँ, हर दिन हम देते हैं समझदारी और रोचक अंदाज़ में कवरेज।

Must Read

©2025- All Right Reserved.