एजेंसी । भोपाल
मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। सागर पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नीचे से ऊपर तक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर प्रभावित लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात भी की। राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र के कई गांवों में संदिग्ध जहरीली शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी थी।
बुधवार तक विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 20 से अधिक बताई गई। पुलिस ने मामले में 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है। इनमें करणी सेना से जुड़े एक स्थानीय पदाधिकारी को मुख्य आरोपी बताया गया है। हालांकि, शराब में मौजूद पदार्थ और मौतों के वास्तविक कारण की जांच जारी है। सरकार ने अवैध शराब के नेटवर्क के साथ-साथ प्रशासनिक और आबकारी स्तर पर संभावित लापरवाही की जांच के निर्देश दिए हैं। शुरुआती जांच में शराब की आपूर्ति को लेकर उत्तर प्रदेश के ललितपुर से संभावित संबंध की बात सामने आई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। इसलिए जांच में आपूर्ति श्रृंखला और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा। प्रशासन को संदिग्ध शराब के
स्रोत का पता लगाने और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।
{प्रदेशभर में कार्रवाई के निर्देश: मुख्यमंत्री ने अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को कहा है। सरकार का कहना है कि दोषियों के साथ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। मामले में न्यायिक जांच से मौतों के कारण, अवैध शराब के स्रोत और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।