एजेंसी। टोरंटो
पंजाब के जालंधर जिले के गोराया से 2018 में कनाडा गए एक परिवार को आठ साल बाद भारत लौटना पड़ा। हरीश कुमार, उनकी पत्नी सोनिका और उनके दो बच्चों का शरण का दावा कनाडाई अधिकारियों ने खारिज कर दिया। परिवार ने मानवीय एवं करुणामूलक आधार पर कनाडा में रहने की भी अपील की, लेकिन वह भी स्वीकार नहीं हुई। इसके बाद परिवार को सात सितंबर को भारत लौटने वाली उड़ान में सवार होना पड़ा।
परिवार ने कनाडा में रहने के दौरान वहां काम किया और अपनी जिंदगी बसाई थी। परिवार का बड़ा बेटा 14 वर्षीय जपेश छह साल की उम्र में कनाडा पहुंचा था। उसने अपना अधिकांश बचपन क्यूबेक में बिताया और वहीं उसके दोस्त और सामाजिक जीवन बने। छोटे बेटे गौरेश की उम्र 12 वर्ष है। परिवार के अनुसार, दोनों बच्चों के लिए भारत लौटना भावनात्मक रूप से मुश्किल है, क्योंकि उन्होंने कनाडा को ही अपना घर माना है।
{ट्रक चालक के रूप में किया काम: हरीश ने कनाडा में ट्रक चालक के रूप में काम किया। परिवार के समर्थकों का कहना है कि उसने कोविड-19 महामारी के दौरान भी जरूरी सेवाओं में योगदान दिया। परिवार ने अपने निर्वासन को रोकने के लिए कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया, लेकिन शरण और मानवीय आधार पर आवेदन खारिज होने के बाद उसके पास कनाडा छोड़ने के अलावा विकल्प नहीं बचा।
परिवार ने न्यायिक समीक्षा का रास्ता भी अपनाया था। अंतिम तौर पर उसे भारत लौटना पड़ा। कनाडा की शरण व्यवस्था में हर आवेदन का व्यक्तिगत आधार पर मूल्यांकन किया जाता है और सुरक्षा संबंधी दावे खारिज होने पर आव्रजन कानून के तहत देश छोड़ने का आदेश दिया जा सकता है।