समर न्यूज | चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को राजनीतिक मामलों की समिति में शामिल किया है। यह समिति पार्टी का शीर्ष निर्णयकारी निकाय है। मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन को भी पार्टी की नई 23 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गई है। इन फैसलों को पंजाब में चुनावी तैयारियों और संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया। पंकज गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव और एनडी गुप्ता को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। पंजाब से मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरपाल चीमा और राजबीर घुम्मन की मौजूदगी राज्य को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व देती है। भगवंत मान को राजनीतिक मामलों की समिति में स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। इससे पहले वह मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर जुड़े थे। हरपाल चीमा को भी इस शीर्ष समिति में जगह मिली है। समिति में दोनों नेताओं की मौजूदगी से पंजाब से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में राज्य नेतृत्व की भूमिका बढ़ने के संकेत मिलते हैं।
घुम्मन को राष्ट्रीय जिम्मेदारी
राजबीर सिंह घुम्मन को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया जाना भी पंजाब की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वह मुख्यमंत्री भगवंत मान के विशेष कार्याधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं और मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगियों में माने जाते हैं। अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिम्मेदारी मिलने से पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में उनकी भूमिका बढ़ेगी। हालांकि घुम्मन का नाम हाल में पंजाब में अधिकारियों के तबादले और तैनाती से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद में भी आया है।
चुनावी तैयारी पर जोर
पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ आम आदमी पार्टी संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर रही है। पार्टी के सामने सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ सत्ता विरोधी माहौल, विपक्षी दलों की सक्रियता और संगठन के भीतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती है। राष्ट्रीय संगठन में पंजाब के प्रमुख नेताओं को नई जिम्मेदारियां दिए जाने से पार्टी के चुनावी प्रबंधन में राज्य नेतृत्व की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
विपक्ष की चुनौती
पंजाब में कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल समेत विपक्षी दल लगातार आम आदमी पार्टी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का ताजा संगठनात्मक पुनर्गठन चुनावी रणनीति को अधिक समन्वित बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पंजाब विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होना है और चुनाव से पहले सभी प्रमुख दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।