summer express, बिलासपुर | जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन दृष्टि’ अभियान के तहत अब तक छह स्कूलों में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के 225 बच्चों की आंखों की जांच की गई है। जांच के दौरान 29 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए, जिनमें 15 बच्चे मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और 14 बच्चे हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) से प्रभावित पाए गए।
उपायुक्त राहुल कुमार ने मिशन दृष्टि अभियान को लेकर अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में अभियान की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की जांच का डेटा तैयार किया जा रहा है, जिससे दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान के साथ उपचार और फॉलोअप की प्रभावी निगरानी की जा सके।
उन्होंने दृष्टि दोष पाए गए बच्चों के अभिभावकों से आग्रह किया कि टीम द्वारा दी गई सलाह के अनुसार 15 दिनों के भीतर नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें और आवश्यक सुधारात्मक उपाय करवाएं।
उपायुक्त ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक नियमित स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच की सुविधा पहुंचाना है। बच्चों में आंखों की समस्या का समय पर पता न चलने से सिरदर्द, किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और पढ़ाई में परेशानी हो सकती है। समय पर चश्मा अथवा अन्य उपचार उपलब्ध करवाकर बच्चों की शिक्षा और दैनिक गतिविधियों में सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सीएसआर और डीएमएफटी के सहयोग से ऑटो-रिफ्रैक्टोमीटर सहित अन्य उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे प्रारंभिक स्तर पर बच्चों की अधिक प्रभावी जांच हो सके।
राहुल कुमार ने कहा कि अभियान को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में अधिक से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग और दृष्टि दोष की पहचान पर जोर है, जबकि दूसरे चरण में नियमित निगरानी और फॉलोअप को मजबूत किया जाएगा। सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों में भी बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी।